रविवार का लॉकडाउन हुआ शर्मसार क्योंकि मयखाने हैं गुलजार।

चाहे करोना बढ़ता रहे पर शराब की कमाई ना घटे।
जबलपुर-देश में कोरोना संक्रमण अब तेज गति से आगे बढ़ रहा है। प्रतिदिन 15 अधिक लोग कोरोनावायरस के संक्रमण से प्रभावित निकल रहे हैं। कब कहां किस को यह संक्रमण घेर ले कहा नहीं जा सकता। फिर भी आर्थिक मजबूरियों के चलते सरकार हफ्ते में सिर्फ 1 दिन का संपूर्ण लॉकडाउन रख रही है। बाकी दिन दुकानें बाजार खुले रहेंगे। रविवार के दिन होने वाले लॉकडाउन के दौरान केवल सब्जी दवाई की दुकान जैसी जरूरी चीजों के लिए ही अनुमति मिली थी। लेकिन हैरानी उस वक्त हुई जब शहर में जगह-जगह शराब की दुकानें खुली मिली। सदर मेंन रोड, आजाद चौक, शिवाजी मैदान, चेेरीताल में शराब की दुकानें खुली पाई गई। ये सवाल है कि जब जनता को बाहर ही नहीं निकलना है शराब की दुकानें किन के लिए खुली हैं? क्या उन लोगों के लिए जो कोरोनावारियर्स है, कोरोनाफाईटर्स है या फिर वो लोग जो लाकडाउन को चकमा देकर शराब खरीदने आ जाते हैं?क्या प्रशासन यह मानकर चल रहा है कि लोग लॉकडाउन में पुलिस को चकमा देकर शराब खरीदने पहुुुंचेंगे? इन सवालों के जवाब जब हमने आबकारी उपायुक्त सत्यनारायण दुबे और कलेक्टर भरत यादव से जानना चाहा तो उन्होंने फोन उठाना मुनासिब नहीं समझा। इस मुद्दे को उठाते और इस विषय पर बोलते हुए शिवसेना के प्रदेश प्रवक्तता कन्हैया तिवारी ने मांग की है सरकार लॉकडाउन केेे दौरान शराब की दुकानें बंद कराए। एक और जहां आम जन की जरूरतों से जुड़ी दुकानें बंद है वहां शराब की दुकानों का खुलना आश्चर्य का विषय है।



