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रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय में 15 सूत्री मांगों को लेकर हड़ताल शुरू।

वेतन विसंगति को लेकर कर्मचारी संघ ने उठाई आवाज


जबलपुर – वेतन विसंगति, सुरक्षा, गंदे पानी की निकासी जैसी कई समस्याओं को लेकर रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय के कर्मचारियों ने विश्वविद्यालय के गेट पर हड़ताल शुरू कर दी है।
गौर करने लायक बात यह है कि विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा इन मांगों के संबंध में कुलसचिव महोदय को कर्मचारी संघ के प्रतिनिधि मंडल से बात करके मांगों की पूर्ति होने के संबंध में बात रखी गई थी किंतु समय पर इन मांगों का निराकरण नहीं किया गया कर्मचारी संघ हड़ताल पर बैठ गया। कई कर्मचारी मध्यप्रदेश शासन के नियमानुसार 1 पद पर 10,20 या 30 वर्षों की सेवा पूरी कर चुके हैं अतः प्रथम द्वितीय तृतीय समय मान वेतनमान का लाभ मिलना चाहिए किंतु उन्हें वह अभी तक नहीं मिला। कई कर्मचारी छठवें वेतनमान से वेतन विसंगति का प्रकरण विश्वविद्यालय के पटल पर रखे हुए हैं किंतु उस पर भी कोई विचार नहीं किया गया। विश्वविद्यालय के सभी तीसरे चौथे श्रेणी के कर्मचारी शिक्षकों अधिकारियों को सातवें वेतनमान का लाभ मिल चुका है लेकिन तकनीकी कर्मचारियों को सातवें वेतनमान का लाभ नहीं मिला है। इसके अलावा शासन के नियमानुसार 1 वर्ष की समय अवधि पूरी होने पर यदि कर्मचारियों का प्रकरण लंबित रहता है तो शपथ पत्र के आधार पर सभी निलंबित कर्मचारियों को बहाल किया जा सकता है। परंतु जयदीप पांडे, प्रदीप शुक्ला, संजय यादव, मुकेश जैन, ऐसे अनेक कर्मचारी हैं। जो 9 वर्षों से लंबित हैं और बहाल नहीं हो पा रहे। मांग है कि इन्हें उनके शपथ पत्र के आधार पर बहाल किया जाए। तकनीकी कर्मचारियों कर्मचारियों को पद की समानता कार्य की समानता योग्यता की समानता के आधार पर वेतन प्रदान किया जाए। विनियमित कर्मचारियों को शासन के नियमानुसार नियमित किया जाए। कर्मचारियों के लिए वाहन स्टैंड की व्यवस्था नहीं है कई बार गाड़ियों से पेट्रोल चोरी हो जाते हैं और गाड़ी भी चोरी हो जाती है। सुरक्षा की व्यवस्था मुहैया कराई जाए। परिसर में गंदे पानी की निकासी की समुचित व्यवस्था की व्यवस्था की जाए। ऐसी ही अन्य मांगों को लेकर कर्मचारी धरने पर बैठे हैं संघ के अध्यक्ष बैसाखू, महासचिव प्रेम पुरोहित,बंशबहोर पटेल, संजय यादव, जय शंकर पांडे, राजेंद्र राजोरिया, गजेंद्र सिंह ऐसे सभी अन्य कर्मचारी धरने पर बैठे हैं। संघ ने प्रबंधन से यह भी कहा है यदि 7 दिनों के अंदर उनकी मांगों का निराकरण नहीं किया जाता है तो वह भूख हड़ताल करने के लिए मजबूर होंगे।

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