संवेदना हीन हुई प्रदेश सरकार।

डॉक्टर्स, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता सहायिकाएं वेतन से वंचित क्यों?
जबलपुर। देश में कोरोना महामारी का कहर बढ़ता चला जा रहा है। इस दौरान डॉक्टर नर्स आंगनवाड़ी कार्यकर्ता, सभी एकजुट होकर काम कर रहे हैं। लेकिन इसके बावजूद बहुत से कर्मचारी ऐसे हैं। जिन्हें मासिक वेतन नहीं मिल पा रहा है। इसी बात को लेकर कांग्रेस ने सरकार पर सभी कर्मचारियों को समय पर वेतन देने की मांग रखी है। देश और प्रदेश में कोरोना महामारी जब चरम पर है हर तरफ मरीज दिन प्रतिदिन बढ़ रहे हैं प्रदेश सरकार ने विनियोग अध्यादेश के माध्यम से स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा आयुष विभाग एवं निर्माण संबंधी बजट में 48 हजार करोड़ की कमी की गई थी । उसी वक्त कांग्रेस ने प्रदेश सरकार को चेताया था । किंतु सरकार ने इसे गंभीरता से नहीं लिया। कांग्रेस ने सरकार से मांग की है कि डॉक्टर, आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं, सहायिकाओं को शीघ्र वेतन प्रदान करें।
मध्य प्रदेश कांग्रेस कमेटी प्रदेश प्रवक्ता टीकाराम कोष्टा ने कहा कि कोरोना महामारी के दौर में 4 महीने से घर-घर दस्तक दे रही आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकों के वेतन के लाले पड़े हैं । कोरोना वायरस संक्रमण का दौर शुरू होने के बाद महिला एवं बाल विकास द्वारा आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं को अप्रैल माह से घर-घर दस्तक देकर लोगों के स्वास्थ्य के सर्वे में लगा दिया गया । अप्रैल से जुलाई का महीना और रक्षाबंधन भी निकल गया परंतु वेतन नहीं मिला । रक्षाबंधन का त्यौहार आर्थिक संकट के बीच मनाया गया।
प्रदेश प्रवक्ता टीकाराम कोष्टा ने कहा कि इसी प्रकार जबलपुर मेडिकल कॉलेज इन्टर्न डॉक्टर्स को भी 4 महीने से स्टाइपेंड की राशि के साथ प्रदेश के घोषणा मुख्यमंत्री द्वारा की गई। प्रोत्साहन राशि भी नहीं मिली है । बजट के अभाव के कारण डॉक्टर, नर्स और सहायक स्वास्थ्य कर्मी मास्क, ग्लब्स और पी पी ई किट के अभाव में अपनी जान दांव पर लगाकर करोना पीड़ित मरीज के स्वास्थ्य की देखरेख में लगे रहे । प्रधानमंत्री ने डॉक्टरों की सेवाओं एवं समर्पण के लिए तालियां तो बजवाई लेकिन दुर्भाग्य हैं कि डॉक्टरों नर्सों और स्वास्थ्य कर्मचारियों को आवश्यक उपकरण 4 माह बीत जाने के बावजूद भी उपलब्ध नहीं करा सके। इसके परिणाम स्वरूप अनेक स्वास्थ्य कर्मी करोना पॉजिटिव भी हो गए । कई डाक्टरों को जान से हाथ भी धोना पड़ा। फिर भी डॉक्टर नर्स जन स्वास्थ्य कर्मियों ने सेवा देने में कोई कमी नहीं की। परंतु इतने लंबे समय के इंतजार के बावजूद भी सरकार ने इनको 4 माह का वेतन नहीं दिया। जो खेद जनक है। मजबूर होकर डॉक्टर्स ने हड़ताल का रास्ता पकड़ा । जिसकी जवाबदार खुद संवेदनहीन सरकार है।



