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मरीजों के परिजनों संग मारपीट, आरोपियों पर मेहरबान क्यों प्रशासन?

पीड़ितों के लिए अब तक उम्मीद का दिया भी नहीं जला सके जिम्मेदार।

जबलपुर। हमारे देश में जिस तरह से कानून की पालना की जाती है। उसे देख कर यह समझना बड़ा मुश्किल हो जाता है, कि कानून में सब बराबर है या सिर्फ बराबरी वालों के लिए कानून है।
समाज में अक्सर ऐसी घटनाएं सामने आती हैं। जहां यह अंदेशा होने लगता है कि शायद कहीं ना कहीं गुनहगारों के साथ रियायत बरती जा रही है।
पीड़ितों पर हुए अन्याय से आहत होकर जिला पुलिस अधीक्षक कार्यालय में ट्रांसपोर्ट नगर व्यापारी संघ और भारती विकलांग विकास मंच के सदस्य गण और पदाधिकारी अपनी गुहार लेकर पहुंचे थे। आरोपों के मुताबिक विगत 8 अगस्त को चिकित्सीय लापरवाही के चलते मरीज राजकुमार जैन की मृत्यु हो गई और जब परिजनों ने इस विषय में चिकित्सालय के कर्मचारियों से बात करनी चाही तो वे वाद विवाद पर उतर आए।
नौबत मारपीट तक पहुंची और इसके बाद डॉक्टरों और कर्मचारियों ने मरीज के परिजनों को कमरे में बंद कर तब तक पीटा जब तक कि वे बुरी तरह घायल ना हो गए। मरीज के परिजनों एवं संगठनों द्वारा दोषियों के विरुद्ध f.i.r. करने एवं वैधानिक कार्रवाई के लिए बार बार निवेदन किया गया। किंतु घटना के 10 दिन बाद भी आज तक आरोपियों के विरुद्ध कोई कार्यवाही नहीं की गई। इन्हीं पीड़ितों में एक विकलांग व्यक्ति भी शामिल था। जिसे भी आरोपियों ने नहीं बख्शा। दृष्टिहीन व्यक्ति को बंद करके उसके साथ मारपीट के आरोपी मेडिकल कॉलेज के जूनियर डॉक्टरों और उनके सहयोगी कर्मचारियों के विरुद्ध अब तक कोई कार्यवाही नहीं की गई। आज का ज्ञापन देने वालों में सुनील कुमार जैन भारतीय विकलांग विकास मंच के प्रदेश अध्यक्ष, राजेश अग्रवाल ट्रांसपोर्ट नगर व्यापारी संघ के अध्यक्ष और उनके साथ पीड़ित परिजन भी मौजूद रहे। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि समय पर उचित कार्रवाई नहीं की गई तो वे सभी धरना और प्रदर्शन करने के लिए मजबूर होंगे।

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