सुशांत केस की जांच करेगी सीबीआई

रंजना मिश्रा कानपुर उत्तर प्रदेश
पूरा देश चाहता था कि सुशांत केस की जांच सीबीआई करे और वही हुआ। महाराष्ट्र सरकार और मुंबई पुलिस की तमाम कोशिशों के बावजूद देश की सबसे बड़ी जांच एजेंसी को मामले की तह तक जाने का जिम्मा सौंप दिया गया।सुप्रीम कोर्ट ने साफ कर दिया कि बिहार में एफ आई आर दर्ज किया जाना बिल्कुल सही था और बिहार सरकार की सीबीआई जांच की सिफारिश भी एक दम सही है। सुप्रीम कोर्ट ने फैसला दिया कि सुशांत केस से जुड़ी किसी भी एफ आई आर की जांच सीबीआई ही करेगी। महाराष्ट्र सरकार फैसले के खिलाफ अपील नहीं कर सकती। सुशांत केस में सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले से देश विदेश में रहने वाले उनके करोड़ों फैंस, सुशांत के परिजन, कई नेताओं और फिल्मी हस्तियों के मन में न्याय पाने की एक नई उम्मीद जगी है। उनके में एक नया भरोसा पैदा हुआ है कि सीबीआई जैसी देश की सर्वोच्च जांच एजेंसी सुशांत की मौत का सच सामने लाने में और सुशांत की मौत के जिम्मेदार लोगों को सजा दिलाने में पूर्णतया सफल होगी। अब सबको विश्वास हो गया है कि सुशांत केस में जो भी सच्चाई है वह पूरी तरह सामने आएगी और सुशांत और उनके परिवार को सही न्याय मिलेगा। सीबीआई को सुशांत केस की उलझी परतों को सुलझाने में काफी चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा किंतु उम्मीद है कि देश की सबसे बड़ी जांच एजेंसी उन चुनौतियों का बखूबी सामना करेगी और सुशांत के परिवार को इंसाफ दिलाएगी। सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले से सुशांत के चाहने वाले बहुत खुश हैं। 66 दिनों की जद्दोजहद के बाद और तेरी जांच-मेरी जांच के बाद आज सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई पर मोहर लगा ही दी और महाराष्ट्र सरकार से कहा है कि वह सीबीआई जांच में सहयोग करे। सुशांत सिंह के परिवार ने भी खुश होकर देश का तथा सुशांत के प्रशंसकों और शुभचिंतकों का आभार जताया और कहा कि उन्हें विश्वास हो गया कि अब दोषियों को सजा मिलेगी।
सुशांत के केस का सच जानना, इस देश के प्रत्येक नागरिक का पूरा हक है। इस केस की जांच महाराष्ट्र पुलिस, बिहार पुलिस और वहां हो रहे राजनीतिक त्रिकोण में फंस कर रह गई थी। लेकिन आज सुप्रीम कोर्ट ने दो राज्यों के इस झगड़े को एक ही झटके में समाप्त कर दिया।
इस केस की आरोपी अभिनेत्री रिया चक्रवर्ती ने सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका लगाई थी और पटना में अपने खिलाफ दर्ज केस को मुंबई ट्रांसफर करने की मांग की थी। रिया ने कोर्ट में ये भी कहा था कि बिहार पुलिस की जांच को आधार बनाकर, इस केस में सीबीआई की जांच की सिफारिश करना गैर कानूनी है। लेकिन सुप्रीम कोर्ट में न तो रिया के पक्ष की कोई दलील चली और न ही महाराष्ट्र सरकार की दलीलें सुप्रीम कोर्ट के सामने टिक पाईं।
सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में तीन अहम् टिप्पणियां की हैं। पहली टिप्पणी में कोर्ट ने कहा कि सुशांत प्रतिभाशाली अभिनेता थे, उनका परिवार मौत की जांच का नतीजा चाहता है। दूसरी टिप्पणी में कोर्ट ने कहा है कि इस मामले में निष्पक्ष और प्रभावी जांच बहुत जरूरी है। इससे सुशांत के पिता को भी न्याय मिल पाएगा जिन्होंने अपना बेटा खो दिया। कोर्ट की तीसरी और सबसे अहम् टिप्पणी में कहा कि सच जब रोशनी में आता है तो न्याय सिर्फ जिंदा व्यक्ति को ही नहीं मिलता, बल्कि न्याय उसे भी मिलता है जो अब इस दुनिया में नहीं है। इस टिप्पणी के बाद फैसले में सत्यमेव जयते लिख दिया गया।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इस तरह के मामले में, जब दो राज्यों के बीच टकराव हो तो फिर निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और इसीलिए यह मामला सीबीआई को सौंपा जा रहा है। इतने महीने बाद जाकर सुशांत के केस में निष्पक्ष जांच शुरू हो पाई। अब सुशांत की आत्मा को भी शांति मिली होगी। इसके पहले देश में किसी एक व्यक्ति की मौत को लेकर इतना दबाव नहीं बना। जब समाज कोई दबाव डालता है तो सुप्रीम कोर्ट और सरकार पर भी इसका प्रभाव दिखाई देता है। मीडिया में सुशांत के मुद्दे को लगातार उठाया गया। फिल्म इंडस्ट्री में कुछ चुनिंदा लोग ही सुशांत को न्याय दिलाने के लिए आगे आए।
मीडिया, फिल्म इंडस्ट्री और राजनीति से, सुशांत के लिए न्याय की मुहिम की ताकत 3 गुना बढ़ गई। अगर महाराष्ट्र की सरकार स्वयं ही सीबीआई जांच करा देती तो महाराष्ट्र सरकार और मुंबई पुलिस पर शक की सुई न घूमती। सीबीआई जांच को रोकने की, महाराष्ट्र सरकार की पूरी रणनीति ही गलत थी। उन्हें पहले दिन से ही सीबीआई की जांच की मांग में साथ देना चाहिए था।
लोकतंत्र का असली मतलब तभी होता है जब जनता की इच्छा का सम्मान हो। जनता क्या चाहती है, इस बात का असर देश की सर्वोच्च अदालत और सरकारों को भी प्रभावित करता है।यही असली लोकतंत्र है। देश की जनता सुशांत के केस की सच्चाई को जानना चाहती है और वह चाहती है कि सुशांत और उसके परिवार को न्याय मिले तथा दोषियों को कड़ी से कड़ी सजा। सुप्रीम कोर्ट और सरकार भी इतने दिन से जनता का रुख समझ रहे थे और इसीलिए सुशांत के केस को हल करने की जिम्मेदारी देश की सबसे विश्वसनीय जांच एजेंसी को सौंप दी गई।



