मध्य प्रदेशसतना दर्पण

मंडी सचिव हर माह शासन को लगा रहे लाखों का चूना

जबलपुर दर्पण सतना ब्यूरो एसपी त्रिपाठी

कृषि उपज मंडी के सचिव राजेश गोयल के कथित कारनामें इन दिनों चर्चा में हैं। आरोप है कि मंडी सचिव गोयल कर्मचारियों व व्यापारियों से सांठगांठ कर शासन को हर माह लाखों का चूना लगा रहे हैं। हराम की कमाई के चक्कर में प्रदेश में दूसरे नंबर की इस मंडी का हाल पूरी तरह से बदहाल हो चुका है।
नियमन किसी भी उपज की मंडी में आवक होने से पूर्व गेट में इंट्री होनी चाहिए, लेकिन यहां ऐसा कोई सिस्टम नहीं है। सचिव साहब की मेहरबानी का आलम यह है कि बिना कोई इंट्री के माल मंडी परिसर के अंदर हो जाता है और मंडी कर्मचारी व व्यापारी मिलकर सामने वाले के माल की सीधे खरीददारी कर लेते हैं। जानकारों के मुताबिक ऐसा करने से वे तो मालामाल हो जाते हैं, लेकिन लंबी चपत शासन के राजस्व को होती है। मंडी में व्यापक पैमाने पर चल रहे गोलमाल के खबर की पुष्टि के लिए जब आक्रोश वार्ता टीम मौके पर पहुंची तो अंधेरगर्दी का सच सामने आया। यहां देखने को मिला कि किसानों व सब्जी-फल विक्रेताओं को मंडी कर्मचारी व व्यापारी उनका माल औन-पौन दाम में खरीदने के चक्कर मे गेट में माल की इंट्री नहीं होने देते। किसी फड़ में 10 बोरा माल रखा होता है तो किसीे में 500 बोरा माल। सबसे बड़ा खेल सब्जी व फल के थोक व्यापारी द्वारा खेल जाता है। सेव फल का ट्रक मंडी परिसर में गेट में बिना इंट्री के थोक व्यापारी के गोदाम में सीधे खाली हो जाता है और रसीद 50 पेटी सेव फल की बनती है। इसमें जो टैक्स बनता है उसे मंडी कर्मचारी व थोक व्यापारी बंदरबांट कर लेते हैं। कुल मिलाकर जिसने खुश कर दिया उसका माल बिक जाता है और जिसने थोड़ा भी आनाकानी की उसे अपना माल बेचने इंतजार करना पड़ता है। इस कृत्य से परेशान व्यापारी अपना माल उनके निर्धारित रेट पर बिक्री करने को मजबूर हो जाता है। जो भी हो फिलहाल मंडी कर्मचारियों व यहां के व्यापारियों की इस कथित सांठगांठ से मंडी के राजस्व को लंबी क्षति हो रही है। इस मामले में मंडी सचिव राजेश गोयल से संपर्क करने का प्रयास भी किया गया, लेकिन मौके पर उनसे संपर्क नहीं हो सका।
खुले आसमान के नीचे बैठते हैं किसान
कहने के लिए तो उपज की बिक्री करने आए किसानों के लिए भवन है, लेकिन वहां अक्सर ताला ही बंद रहता है। लिहाजा विक्रेताओं को खुले आसमान के नीचे बैठना पड़ता है। शौचालय की स्थिति तो ऐसी है कि वहां जाने वाला गश्त खाकर वहीं गिर पड़े। यहां पेयजल व्यवस्था का भी जबरदस्त रोना देखने को मिला।
तुलावटी कर्मचारियों का बुरा हाल
मंडी कर्मचारियों व यहां के व्यापारियों की मनमानी से तुलावटी कर्मचारियों का भी बुरा हाल है। जो पैसा देता हैं उन्हें किसानों की उपज तौल के लिए दी जाती है और दे पाने की स्थिति पर नहीं होते उन्हें यह सेवा नहीं दी जाती। ऐसी स्थिति में तुलावटी कर्मचारियों के सामने भुखमरी की भी समस्या बन पड़ती है। बताया जाता है कि इस मामले में लक्ष्मीकांत शुक्ला और उनके दो शागिर्द गर्ग व ठाकुर साहब की प्रमुख भूमिका रहती है। मंडी के पूरे कैम्पस को शुक्ला जी डील करते हैं। लक्ष्मीकांत शुक्ला मंडी सचिव राजेश गोयल के खास भी बताए जाते हैं। यही वजह है कि इनकी मनमानी पर फिलहाल किसी का कोई नियंत्रण नहीं है।

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