महिला कानूनों का हो रहा है दुरुपयोग।

प्रतिदिन 150 से 175 पुरुष कर रहे हैं आत्महत्या।
जबलपुर। वह कानून जिनकी कल्पना, संरचना और उन्हें लागू करने के पीछे मंशा यह थी कि पीड़ित और प्रताड़ित महिलाओं को न्याय मिले। उन्हें समाज में सम्मान मिले। लेकिन कुछ लोग ऐसे होते हैं जो अपने स्वार्थ के लिए इन कानूनों का दुरुपयोग करते हैं और फिर शुरू होती है, न्याय को गुमराह करने से लेकर, झूठ मनगढ़ंत आरोप, ब्लैक मेलिंग, पैसा वसूलना और आत्महत्या के लिए मजबूर कर देने जैसी अंतहीन कहानियां। इस तरह के केस अदालतों में आते हैं तो यहां महिलाओं का पल्ला, उनके लिए बनाए गए कानून की वजह से पहले से भारी होता है। जिसकी वजह से पुरुष के परिवार वाले और पुरुष ना केवल अपमान महसूस करते हैं बल्कि ब्लैक मेलिंग और प्रताड़ना से बचने का उन्हें कोई रास्ता नहीं सूझता। इस तरह के विचार निर्भया के केस में बचाव पक्ष के वकील जो कि सुप्रीम कोर्ट के चर्चित और वरिष्ठ वकील भी हैं एपी सिंह ने आज एक पत्रकार वार्ता के दौरान कही। मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय जबलपुर बेंच में वे एक केस की पैरवी के सिलसिले में यह बात कह रहे थे। वर्तमान में जो मामला उनके संज्ञान में है। उसके तहत उन्होंने कहा कन्हैयालाल चौरसिया की बेटी रश्मि चौरसिया मल्टीनेशनल कंपनी में ऊंचे पद पर कार्यरत है। जो लाकडाउन के दौरान भी कार्यरत ही रही। इसके बावजूद अपने पति पर भरण पोषण के झूठे केसों को लगाकर उनका जीवन बर्बाद कर रही है। उनके पारिवारिक सुख शांति को भंग कर रही है। इतना ही नहीं करिश्मा चौरसिया ने बेंगलुरु में दहेज प्रताड़ना के तहत झूठा मुकदमा दर्ज कराया था। ट्रायल पूरा होने के बाद उनका पति हनी चौरसिया इस मामले में पूरी तरह से निर्दोष होकर बरी हुआ। दोनों परिवारों की पृष्ठभूमि अच्छी है, पढ़े लिखे हैं। इसके बावजूद करिश्मा चौरसिया ने घरेलू हिंसा का झूठा केस लगा रखा है। उनके परिवार वालों को परेशान किया जा रहा है।
गौर करने लायक बात यह है कि करिश्मा चौरसिया के पिता कन्हैया लाल चौरसिया मध्य प्रदेश न्यायपालिका में प्रोटोकॉल ऑफिसर हैं और वे अपने पद का दुरुपयोग कर रहे हैं।
कुल मिलाकर इस केस में मिसकैरिज आफ जस्टिस हो रहा है।
वहीं दूसरी तरफ हनी चौरसिया द्वारा प्रिंसिपल रजिस्टार विजिलेंस मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय जबलपुर ,संभागीय संयुक्त निदेशक प्रशासन एनफोर्समेंट डायरेक्टरेट ई डी नई दिल्ली, मानवीय निदेशक मध्यप्रदेश राज्य जुडिशल एकेडमी को कई बार इस संबंध में शिकायत दी गई और व्यक्तिगत रूप से भी मिले किंतु अभी तक कोई कार्यवाही नहीं हो पा रही है।
वरिष्ठ वकील डॉक्टर ए पी सिंह का कहना है कि जब संविधान में महिलाओं पुरुषों को बराबर के अधिकार हैं। फिर राष्ट्रीय महिला आयोग, राज्य महिला आयोग, महिला मंत्रालय, महिला हेल्पलाइन, महिला डेस्क, महिला अपराध शाखा क्यों?
आखिरकार पीड़ित पुरुष भाई, ससुर, जेठ, देवर और उनसे संबंधित अन्य रिश्ते से जुड़ी महिलाएं जैसे साथ सांस,नन्द, जेठानी, बहने अपने ऊपर हो रहे शारीरिक, मानसिक अत्याचारों और आर्थिक शोषण के खिलाफ जाएं तो जाएं कहां। साथ ही डॉ ए पी सिंह ने कहा कि यदि पुरुष आयोग या पुरुष मंत्रालय होता तो अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत जैसे पीड़ित पुरुष आत्महत्या कर जान नहीं गंवाते।
इस विषय में डॉक्टर सिंह ने मांग की है कि अदालतों को चाहिए कि इस तरह के बढ़ते मामलों पर गंभीरता से विचार करें और झूठा केस लगाने वाली महिलाओं को दंडित किया जाए। ताकि न्याय की तराजू के दोनों पलड़े बराबर हो सके। इस मामले में पीड़ित पुरुष हनी चौरसिया की माता श्रीमती आभा चौरसिया भी मौजूद रहीं और उन्होंने भी मीडिया के सामने अपनी व्यथा रखी।



