मर गई या फिर बिक गई मछली के बीज

अधिकारी ने थोपा प्रकृति पर
उमरिया। इस वर्ष हुई धुआंधार बारिश के कारण मछली पालन के किसान भी बढ़ गये है, जिसके कारण बीज वितरण मे भीड़ भी जमकर देखी जा रही है, लेकिन यहां भी रसूख का दम काम आ रहा है और दिनभर छोटे तबके के किसान धूप सेंकते है॥ सरकार से करीब 2 करोड़ श्वानों को तैयार कर उमरिया मतस्य विभाग ने बीज तैयार किया मगर करीब डेढ़ करोड़ मछली के बीज लापरवाही की भेंट चढ़ गई और सरकार को जमकर चूना लगा॥ इस मामले को लेकर मछली पालन मे लगे किसानों की माने तो विभाग की यह कहानी हर साल की है, लेकिन इस साल मछली के इतनी बड़ी मात्रा मे मर जाना हजारों सवालों को जन्म दे रहा है॥ अब मछली के बीज मर गये या फिर विभाग के जिम्मेदारों ने सरकारी आंखों को मूंदकर बेच दिये यह तो जांच का विषय है, हालांकि इस बात की पुष्टि तो नही हो पाई लेकिन यह बात आग की तरह जिले भर मे फैली हुई है कि मछली के करीब डेढ़ करोड़ बीज चोरी छिपे बेच दिये गये है॥
मौसम के कारण हुई मछली बीजों की मौत
मामले के संबंध मे जब सहायक मतस्य अधिकारी श्रीवास्तव का कहना है कि सरकार की तरफ से हमकों 2 करोड़ स्वान मिले थे, जिनको इन छोटे छोटे तालाबों मे तैयार किया जा रहा था कि अचानक मौसम मे गर्माहट होने के कारण 1 करोड़ 40 लाख मछली के स्वान मर गये थे, जबकि हकीकत यह है कि इस वर्ष मौसम ठंडा ही रहा और समय समय मे पानी गिरता रहा है॥
तो देखरेख किस काम की
सरकार से हर माह मोटी पगार पाने वाले अधिकारी कर्मचारियों की तैनाती इसी बात के लिए की जाती है कि वह बीजों का विशेष ध्यान रखकर वितरण करें, जिनके रहने से लेकर सारी व्यवस्थाएं माकूल की गई है, यहां तक की मछली के बीजों की देखरेख और पानी गर्म न हो इसके लिए दो ट्यूब बेल कराये गये है, बाबजूद इतनी बड़ी संख्या मे मछली बीजों का मर जाना संदेह के दायरे मे है, वही सूत्र यह भी बताते है कि लाखों रुपये का बीज अधिकारी ने बेच डाला है॥ बहरहाल मामले मे क्या होगा यह तो वक्त ही बतायेगा, परंतु सरकार का भारी नुकसान आज कई सालों से होता आ रहा है॥



