चुनाव जरूरी है या वोटरों की जान।

कोरोना के प्रहार में आक्सीजन की कमी।
जबलपुर। ऑक्सीजन की कमी कोरोनावायरस ओं की जान पर बनती चली जा रही है आए दिन इस तरीके की घटनाएं सामने आ रही हैं लेकिन फिर भी प्रदेश सरकार का एक रवैया ना केवल उदासीन और लापरवाही पूर्ण है बल्कि सरकार की चुनावी रणनीति जारी है। कुछ इसी तरह के विचार व्यक्त किए प्रदेश कांग्रेस प्रवक्ता टीकाराम कोस्टा ने।
मध्यप्रदेश कांग्रेस प्रदेश प्रवक्ता टीकाराम कोस्टा ने कहा कि कोरोना महामारी से पीड़ित मरीज के इलाज में मेडिकल कॉलेज एवं निजी हॉस्पिटल द्वारा बरती जा रही लापरवाही की ओर कांग्रेस द्वारा शासन प्रशासन का ध्यान अनेक बार आकर्षित कराया गया ।मध्य प्रदेश शासन के पूर्व मंत्री लखन घनघोरिया एवं कांग्रेस अध्यक्ष दिनेश यादव द्वारा समय-समय पर जिला अध्यक्ष एवं संभागीय आयुक्त को व्यक्तिगत एवं ज्ञापन के माध्यम से मांग की जाती रही ।कि डब्ल्यूएचओ के अनुसार अगस्त, सितंबर माह में कोरोना पीड़ितों की संख्या अधिक रहेगी। कांग्रेस प्रदेश प्रवक्ता ने आरोप लगाया कि शासन प्रशासन ने अस्पतालों में बैड की संख्या तो बढ़ाई किंतु डॉक्टर एवं स्टाफ की संख्या एवं आईसीयू बैड बढ़ाने एवं ऑक्सीजन की मांग के अनुसार उपयोगिता पर कोई ध्यान नहीं दिया।
कांग्रेसप्रदेश प्रवक्ता टीकाराम कोष्टा ने कहा कि 5 माह पूर्व तक कोरोना पीड़ितों को इलाज आसानी से मिल रहा था सैकड़ों मरीज स्वस्थ भी हुए किंतु जैसे-जैसे मरीजों की संख्या बढ़ी निजी एवं शासकीय मेडिकल कॉलेज में व्यवस्थाएं चरमरा गई। कोरोना काल में प्रदेश और
शहर के अस्पतालों में अब तो मरीजों को ऑक्सीजन की कमी से जूझना पड़ रहा है ।विशेषज्ञों की मानें तो कोरोना मरीज के लिए सरकार ने समय रहते ऑक्सीजन जो इलाज का बहुत बड़ा घटक है यह सर्व विदित होने के बावजूद प्रदेश सरकार ने 6 माह का लंबा समय बीतने के बावजूद मेडिकल ऑक्सीजन के उत्पादन को बढ़ाने एवं मांग के अनुसार पूर्ति की पर्याप्त व्यवस्था नहीं की गई । जिसका खामियाजा कोरोना पीड़ित मरीजों को भोगना पड़ रहा है ।सरकार के मंत्री चुनाव लड़ने में एवं जीतने में व्यस्त हैं।
कोष्टा ने कहा कि ऐसी चर्चा व्याप्त है कि कोरोना पीड़ित मरीजों के इलाज में हो रही लापरवाही के खिलाफ जो राजनीतिक दल के कार्यकर्ता आवाज बुलंद कर रहे हैं उनके साथ निजी एवं शासकीय हॉस्पिटल मेडिकल कॉलेज में दोयम दर्जे का व्यवहार किया जा रहा है। विगत दिनों कांग्रेस सेवा दल का साथी जो मेडिकल कॉलेज में भर्ती था ऑक्सीजन की कमी का शिकार हो गया।



