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यक्ष प्रश्न, गौ सेवा पर प्रतिबंध क्यों?

गोवंश और मां नर्मदा के संरक्षण में अभिशाप बना दयोदय।

जबलपुर। पीड़ित मानवता की निस्वार्थ सेवा करना प्राणी मात्र की रक्षा संरक्षण और उसके नैसर्गिक जीवन को बनाए रखना ऐसी मूलभूत और दिव्य धारणाओं की संस्कृति वाला यह देश सनातन परंपराओं के आधार पर विकसित जीवन शैली का पालन कर रहा है।
वसुदेव कुटुंबकम जैसे कितने ही सिद्धांत यहां के लोगों की दिलों में रचे बसे हैं इसके बावजूद कुछ विघ्न संतोषी और दुराग्रही लोग जनहित और प्राणी मात्र के हित के विरुद्ध कार्य करते हैं और अपने मंसूबों को पूरा करने में कोई कोर कसर बाकी नहीं रखते लेकिन सबसे बड़ी विडंबना तब खड़ी हो जाती है, जब खुद प्रशासन उनके साथ खड़ा होता है। कुछ इसी तरह के आक्रोशित उद्गारों को गौ सेवक और संत भैया जी सरकार ने व्यक्त किए।
नगर निगम द्वारा संचालित तिलवारा स्थित बेसहारा गोवंश के लिए समर्पित गौशाला में विगत 2 वर्षों से नर्मदा मिशन व समर्थकों चिकित्सा सेवा केंद्र द्वारा निस्वार्थ दिन-रात सेवा दी जा रही है जिसके कारण बेसहारा गोवंश की दशा में बड़ा परिवर्तन आया है विगत 2 वर्षों में गोवंश की संख्या 400 से 1400 तक पहुंच गई है समर्थ सद्गुरू भैया जी सरकार के मार्गदर्शन और सानिध्य में जनभागीदारी से गोवंश को पौष्टिक आहार उपलब्ध हुआ है। साथ ही चिकित्सक दल भी 24 घंटे उनकी सेवा में उपस्थित रहता है। समाज में सेवा के नाम पर गौ माता का शोषण करने वाली दयोदय जैसी संस्था के दबाव में आकर नर्मदा मिशन की सेवाओं पर रोक लगा दी गई है और गौ माता की सेवा में अपना सर्वस्व निछावर कर चुके भक्तों का, नगर निगम में गौशाला में प्रवेश को प्रतिबंधित कर दिया गया है।
इस अवसर पर बॉडी संख्या में गौ सेवक संस्थाएं और मीडिया बंधू मौजूद रहे।

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