खमरिया पुलिस की कार्यशैली पर उठे सवाल।

पंडित राममूर्ति मिश्रा ने दर्ज कराया विरोध।
जबलपुर। जिस पुलिस विभाग पर देश की आंतरिक सुरक्षा की जिम्मेदारी है। साथी जनता की रक्षा करने की जिम्मेदारी है। अगर उसी पुलिस विभाग की कार्यशैली जनहित के खिलाफ जाए न्याय अन्याय देखकर उचित निर्णय लेने की बजाए। पीड़ित को परेशान करने और पीड़क को संरक्षण देने की नीति पर पुलिस काम करने लगे। तब ऐसी स्थिति में समाज के अग्रणी और प्रभावी व्यक्तित्व को सामने आकर उसका विरोध करना होता है। यह उनका कर्तव्य भी है और जनहित में उठाया गया एक सही कदम है।
जब पुलिस की कार्यशैली अपने कर्तव्य के उद्देश्य को पूरा करने की वजाय,उसके विपरीत दिशा में चले। तब उसे रोकना जरूरी हो जाता है। उक्त आशय के उद्गार जिला पुलिस अधीक्षक कार्यालय जबलपुर में पंडित राममूर्ति मिश्रा ने व्यक्त किए। उन्होंने बताया कि खमरिया थाने की पुलिस पीड़ित का साथ देने की बजाय उसे परेशान कर रही है। उसके खिलाफ मुकदमे दर्ज कर मामलों में फंसा देने की बात कर रही है। इसके साथ ही उन्होंने पुलिस पर अनैतिक तरीके से अर्थ उपार्जन का आरोप भी लगाया। इस संदर्भ में उन्होंने ग्रामीण पुलिस अधीक्षक शिवेश बघेल से मुलाकात की। तब कार्यक्षेत्र अलग होने की वजह से उन्होंने इस मामले में हस्तक्षेप करने में असमर्थता व्यक्त की।
इसी बीच पुलिस अधीक्षक कार्यालय में राममूर्ति मिश्रा से एक मां और बेटे ने अपनी व्यथा कही। उनका कहना था कि घमापुर थाने की पुलिस द्वारा उनके साथ न्याय पूर्ण कार्यवाही नहीं की जा रही है। आरोपियों ने उनके साथ मारपीट की उन्हें प्रताड़ित किया, परंतु फिर भी पुलिस कोई कार्यवाही नहीं कर रही है। इस प्रत्यक्ष उदाहरण को देखकर पंडित राममूर्ति मिश्रा की पुलिस की कार्यशैली पर प्रश्नचिन्ह खड़ा करने वाली बात साबित होती है। इसके बाद यातायात थाने में पदस्थ नगर पुलिस अधीक्षक से संपर्क किया गया।



