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ओबीसी के हित में उठाई गई आवाज।

अखिल भारतीय ओबीसी महासभा का सम्मेलन।

जबलपुर। संविधान में आबादी के हिसाब से आरक्षण की बात थी लेकिन उसे दरकिनार कर दिया गया और आज संसद और विधानसभा में एसटी एससी समाज को आरक्षण है। आरक्षण के अनुरूप उनकी सीटें भी हैं। लेकिन ओबीसी समाज हाशिए पर है। यह कहना है अखिल भारतीय ओबीसी महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष ओबीसी ललित कुमार का। वो एक सम्मेलन में 4 अक्टूबर को दाऊ मैरिज गार्डन में आयोजित किया गया। इसमें प्रदेश अध्यक्ष एडवोकेट इंद्र कुमार पटेल, राष्ट्रीय अध्यक्ष युवा मोर्चा रूपेन्द्र पटेल मौजूद रहे और ओबीसी महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष एक रथ यात्रा लेकर निकले हैं। जिसके तहत ओबीसी समाज में अपने अधिकारों के प्रति जागरूकता फैलाने का काम कर रहे हैं। उसके अनुरूप उन्होंने अपनी कुछ मांगे रखी हैं। शिक्षा और स्वास्थ्य का निजीकरण बंद हो, सभी के लिए फ्री सामान शिक्षा स्वास्थ्य की व्यवस्था हो। जैसे विधायकों, सांसदों को 5 साल के कार्य के बाद जीवन भर पेंशन मिलती है। वैसे ही सभी कर्मचारियों को पेंशन दी जाए। 2005 के पूर्व की व्यवस्था लागू की जाए। ओबीसी समाज को उनकी जनसंख्या के अनुपात में सरकारी नौकरियों में 65% आरक्षण दिया जाए। ओबीसी, एसटी, एससी विधान परिषद राज्यसभा में संख्या के अनुपात में प्रतिनिधित्व दिया जाए। आदिवासी समाज की पांचवी, छठवीं अनुसूची लागू की जाए। उन्होंने यह बातें लोगों के सामने रखी और लोगों से इस विषय में उनका समर्थन मांगा। इस अवसर पर बड़ी संख्या में ओबीसी समाज के लोग मौजूद थे। इस दौरान पनागर विधानसभा के यूथ कांग्रेस पूर्व अध्यक्ष, और पूर्व पार्षद प्रमोद पटेल मौजूद रहे और उन्होंने मीडिया से बात करते हुए बताया कि, इस आयोजन से निश्चित ही ओबीसी समाज के भीतर एक चेतना जागेगी और भी अपने अधिकारों के लिए एकत्रित होंगे।

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