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महिला पार्षद या रबर स्टैंप।

घर से निकल कर काम करने की बजाय घूंघट में छुपी रहीं।

जबलपुर। महिला सशक्तिकरण के नाम पर महिला आरक्षण का मुद्दा जोर-शोर से उठा और महिलाओं की मांग पूरी भी हुई उन्हें आरक्षण मिला लेकिन इस आरक्षण के बाद जो हुआ उसने एक बार फिर यह साबित कर दिया कि आप कुछ भी कर लो परिणाम ढाक के तीन पात ही रहने वाले हैं।
दरअसल राजनीति के पुरुष खिलाड़ियों ने चुनाव के मैदान में अपने घर की महिलाओं को उतार दिया पुरुषों के वर्चस्व के चलते हुए जीत कर भी आ गई। लेकिन महिलाओं को मिले पद की सारी बागडोर पुरुषों के हाथ में रहे और महिलाओं ने केवल सिग्नेचर करने का काम किया।
यह विचार प्रस्तुत किए समाजसेवी सीमा पचौरी ने और उन्होंने अपनी तरफ से मतदाताओं के नाम एक संदेश भी जारी किया।

कब तक चुनोगे रबर स्टैंप प्रत्याशी? वो जो केवल चुनाव के समय, बरसाती मेंढक की तरह सामने आकर, चुनाव जीतने का दम भरनेवाली हैं। आखिर कब तक ऐसे लोगों को जिताएंगे आप?
अपने आप से ये सवाल जरूर पूछिए, कि बीते पांच सालों में, महिला सीट पर, जीत कर आने वाली, राजनेताओं की पत्नियां, भाभियां जैसी दूसरी महिला रिश्तेदार, जनता के बीच जाकर उनका दर्द कब समझती हैं?
बीते पांच सालों में वो कितनी बार अपने घरों से निकली और महिलाओं के हित में आवाज उठाई? क्षेत्र के विकास के लिए कब, मौके पर खड़े होकर काम कराया?

अगर वो चाहतीं तो जनता ने उन्हें अधिकार दिए थे,
एक जिम्मेदार पद दिया था, विकास के लिए पैसा भरपूर दिया था। महिलाओं के हित में वो उल्लेखनीय काम कर सकती थीं।
वो चाहतीं तो बेटियों को कोख में मारने वालों के खिलाफ, आवाज उठा सकती थी।
आए दिन महिलाओं के साथ छेड़छाड़ और बलात्कार जैसी घटनाओं के खिलाफ, आवाज उठा कर महिला सुरक्षा के लिए काम कर सकती थीं।
गली मोहल्लों में सड़क, नाली बनाने के साथ, सरकार की योजनाओं को सीधे लोगों तक पहुंचाने और भ्रष्टाचार को मिटाने की नई पहल कर सकती थीं।

लेकिन महिला सीट पर, महिला नेता के रूप में चुनी गईं ये महिलाएं, घर के भीतर घूंघट में ही बनी रहीं। जनता ने उन पर भरोसा करके जो जिम्मेदारी उन्हें दी थी। वो जिम्मेदारी, उन्होंने अपने परिवार के उन्हीं राजनेताओं के भरोसे छोड़ दी। जिनके नाम पर वह जीत कर आईं थीं। उन्होंने केवल अपने परिवार के पुरुषों द्वारा बताई गई जगह पर, साइन करने के अलावा और कुछ नहीं किया।
अब एक क्या आखरी सवाल,
अभी भी आप लोग जागोगे और अपने लिए कोई संवेदनशील, दूसरों के दर्द को समझने वाली, मौके पर खड़े होकर खुद विकास के कामों को कराने वाली, महिला सुरक्षा और महिलाओं के हित की आवाज उठाने वाली, किसी ईमानदार, सक्रिय महिला प्रत्याशी चुनोगे। या एक बार फिर चुनाव जीतने के बाद घूंघट में छुप जाने वाली किसी रबर स्टैंप महिला प्रत्याशी को चुनोगे।
अपने आसपास देखिए और किसी सक्रिय और ईमानदार महिला को तैयार कीजिए कि वह आपकी नेता बनकर आगे आए और विकास के काम करें, महिला सुरक्षा की बात करें, कम से कम जनहित में खुद निर्णय लेकर अपने बुद्धि और विवेक से काम करें।
उम्मीद है इस बार के चुनाव में जागरूक महिलाएं सामने आएंगी और क्षेत्र के विकास में सक्रिय योगदान देंगी।

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