कौड़ियों के दाम पर अन्नदाताओं की हड़पी गई जमीन

अल्ट्राटेक सीमेंट प्लांट बेला की अंधेरगर्दी का खुलासा
रीवा। हमारे देश में सबसे बुरे दौर से गुजरने वाले अन्नदाताओं की जमीन पर हमेशा उद्योगपतियों की निगाहें बनी रहती है। किसानों का शोषण देश के व्यवस्था की पहचान बन गई है।
कौड़ियों के दाम पर किसानों की जमीन हड़पने का सिलसिला आखिर हमारे देश में कब थमेगा।जेपी एसोसिएट् से बेला सीमेंट प्लांट खरीदने वाले अल्ट्राटेक सीमेंट लिमिटेड ने कौड़ियों के दाम पर अन्नदाताओं की जमीन हड़पने का कारोबार शुरू कर दिया है।
आसपास के गांवों में किसानों की जमीन हथियाने का सुनियोजित खेल फैक्ट्री प्रबंधन के इशारे पर जारी है। योजनाबद्ध तरीके से साजिश के तहत किसानों की जमीन हडपी जा रही है।माइंस के लिए केवल जमीन लीज पर लेने की व्यवस्था देश में लागू है, पर औद्योगिक घरानों के लोग किसानों को धोखे में रखकर उनकी जमीनों की रजिस्ट्री करवा लेते हैं।
मजेदार बात यह है कि किसानों को यह पता होता है कि वे अपनी जमीन अल्ट्राटेक सीमेंट लिमिटेड को बेंच रहे हैं पर चालाकी के साथ फैक्ट्री का प्रबंधन तीसरी पार्टी के नाम पर किसानों की जमीन हथिया रहा है।
ग्राम जोनही निवासी अशोक पयासी ने अपनी आनलाइन रजिस्ट्री दिखाते हुए बताया कि रजिस्ट्री कराने के दौरान हमें कोई कागज नहीं पढ़ाया गया,
केवल आन लाइन सिस्टम में अंगूठा लगवाया गया था। उन्होंने कहा कि मेरी एक एकड़ पच्चीस डिसमिल जमीन अल्ट्राटेक सीमेंट लिमिटेड ने ली है।
पयासी ने बताया कि जमीन लेने के दौरान पचास लाख रुपए मुआवजा और एक व्यक्ति को नौकरी देने का आश्वासन दिया गया था। रजिस्ट्री कराने के दौरान केवल पंदह लाख रुपए अशोक पयासी को दिए गए।
इसके बाद से अब तक कोई पैसा सीमेंट फैक्ट्री ने नहीं दिया और न ही किसी को नौकरी मिली है।
मास्टरमाइंड तरीके से अल्ट्राटेक सीमेंट लिमिटेड ने गोपनीय प्रकिया के तहत किसानों की जमीन की रजिस्ट्री करवाई है।
उन्होंने बताया कि अनिल त्रिपाठी सहित दूसरे किसानों के साथ भी धोखे में रखकर जमीन हड़पने का काम किया गया है। अशोक पयासी ने कहा कि आन लाइन निकाली गई रजिस्ट्री लेकर मैं न्यायालय की शरण में जाऊंगा।



