मध्य प्रदेशरीवा दर्पण

प्रभारी प्राचार्य अवस्थी ने लिखी चिट्ठी, अपने को भूलीं

तो फिर वर्ष 2002-03 से अब तक करवाएं आडिट!
रीवा दर्पण। विंध्य प्रदेश की पहचान शासकीय ठाकुर रणमतसिंह महाविद्यालय में अनिश्चितताओं का दौर थमने का नाम नहीं ले रहा है। अब एक नये हंगामे की आहट होने लगी है। कालेज में तैनात तमाम वरिष्ठ प्रोफेसरों को दर किनार करते हुए विकास पुरुष ने जूनियर डा अर्पिता अवस्थी को टीआरएस कॉलेज का प्रभारी प्राचार्य बनवा दिया गया। कालेज प्रमुख की कुर्सी पर बैठते ही मैडम ने विशेष रुप से एक सूत्रीय एजेंडे पर तेजी से अमल शुरू कर दिया। अमहिया दरबार से मिले हुक्म के अनुरूप टीआरएस कालेज के प्राचार्य डा अवस्थी ने शासन को एक चिट्ठी लिखी है। उन्होंने शैक्षणिक सत्र 2006-07 से अब तक आडिट कराने का आग्रह किया है। निशाने पर विशेष फोकस प्रायोजित तरीके से उसी पूर्व प्राचार्य को लिया गया है जिनके कार्यकाल में ही टीआरएस कालेज का वास्तविक विकास सबके सामने आया है। स्वच्छता की मिशाल बनाने के साथ साथ सबसे बेहतर गार्डन का डेवलपमेंट टीआरएस कालेज में किया गया। सूत्रों ने कहा कि जब मैडम अवस्थी ने हायर एजुकेशन को चिट्ठी भेज ही दी है तो बेहतर होगा कि जब से टीआरएस कालेज को उत्कृष्टता संस्थान का दर्जा मिला है तभी से यानी शैक्षणिक सत्र 2002-03 से लेकर अब तक की आडिट पूर्ण पारदर्शिता के साथ स्वयं उच्च शिक्षा विभाग करवाए। प्राचार्य की कुर्सी पर बैठने के बाद मैडम अवस्थी ने शिकवा शिकायतों के अलावा कोई दूसरा काम संस्था हित में नहीं किया है। चिट्ठी लिखने वाली प्रभारी प्राचार्य डॉ अवस्थी अपने स्वयं के कार्यकाल का उल्लेख करना जानबूझकर आवश्यक नहीं समझा। जबकि सबसे रोचक और मजेदार बात यह है कि सत्र 2002-03 से लेकर 2006 तक प्रभारी प्राचार्य की भूमिका डॉ अवस्थी ने खुद निभाई है। ऐसे में उत्कृष्टता संस्थान टीआरएस कालेज में वित्तीय संरचना का निर्माण स्वयं मैडम अवस्थी ने किया है। उन्होंने भी तरह-तरह के भुगतान हासिल किए हैं।

वित्तीय वर्ष में तीन बार होती है कालेजों में आडिट
उच्च शिक्षा विभाग से मिली जानकारी के अनुसार हर वित्तीय वर्ष के दौरान तीन बार संस्थानों की आडिट कराई जाती है। जिसमें दो बार मध्यप्रदेश शासन और एक बार ग्वालियर की टीम आडिट करने कालेज आती है। ऐसे में आडिट की विश्वसनीयता पर सवाल उठाना समझ से परे है। फिर भी यदि इतिहास को बदला जा रहा है तो फिर सत्र 2002-03 से अब तक की वार्षिक आडिट करवाया जाना सबसे बेहतर होगा। विकास पुरुष की विशेष कृपा हासिल करने वाले प्रभारी प्राचार्य टीआरएस कॉलेज के लिए सबसे बड़ी जिम्मेदारी पूर्व प्राचार्य पर किसी भी तरह से आरोपों की झड़ी लगाना है। यही वजह है कि उन्हें निलंबित कराने के बाद भी प्रभारी प्राचार्य को चैन नहीं आया है। उन्होंने उच्च शिक्षा विभाग के आला अधिकारियों को पत्र लिखते हुए सचिन सत्र 2006 7 से अब तक की ऑडिट कराने की मांग उठाई है। टीआरएस कॉलेज को उत्कृष्टता संस्थान का दर्जा वर्ष 2002-03 के दौरान मिला था, उसी समय वित्तीय संरचनाओं का निर्माण किया गया था ऐसे में उच्च शिक्षा विभाग यदि सत्र 2002-03 से अब तक की वार्षिक आडिट करवाए तो कहीं बेहतर परिणाम शासन के सामने आ जाएंगे।

उठने लगी आवाज, चौदह आरोपियों पर कार्रवाई कब?
शासकीय ठाकुर रणमत सिंह महाविद्यालय में 14.09 करोड रुपए के आर्थिक अनियमितता संबंधी मामले को कलेक्टर की जांच समिति ने उजागर किया था। जांच के दौरान तीन पूर्व प्राचार्य सहित कुल 15 आरोपियों का नाम सामने आया था जिसमें टीआरएस कॉलेज के वरिष्ठ प्राध्यापकों का नाम शामिल है। अब सवाल यह उठता है कि जब जांच प्रतिवेदन के आधार पर एक पूर्व प्राचार्य को निलंबित कर दिया गया तो उसी मामले में सह आरोपी बताए गए शेष अन्य 14 लोगों पर अब तक शासन स्तर से किसी तरह की कार्यवाही क्यों नहीं की गई? हालांकि टीआरएस कॉलेज को लेकर विशेष रूचि दिखाने वाले रीवा के विकास पुरुष लगातार उच्च शिक्षा के अधिकारियों पर इस बात का दबाव बना रहे हैं की 14.09 करोड के आर्थिक अनियमितता वाले मामले में सभी आरोपियों के खिलाफ जल्द से जल्द कार्यवाही को पूरा किया जाए। उधर दो पूर्व प्राचार्य डॉ सत्येन्द्र शर्मा, डॉ एसयू खान सहित टीआरएस कालेज में तैनात अन्य वरिष्ठ प्राध्यापकों के खिलाफ अब किसी तरह की कार्यवाही का आदेश जारी न होना अपने आप मामले को संदेहास्पद बता रहा है।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button

You cannot copy content of this page