मध्य प्रदेशरीवा दर्पण

एमआरपी रेट से ज्यादा में बिक रही शराबआबकारी अधिकारियों ने मूंदी आंखे

मामला मझगवां के हिरौंदी गांव की स्थित शराब दुकान का

आबकारी अधिकारी सुधार करने को तैयार नहीं

मझगवा।हिरौंदी अवैध शराब और मनमानी वसूली पर रोक लगाने के लिए कई बार मुद्दे उठ चुके हैं, लेकि न आबकारी अधिकारी सुध ही नहीं लेते हैं। यही कारण है कि तहसील मजगवां क्षेत्र के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायतों में धड़ल्ले से अवैध शराब का कारोबार पनप रहा है और वैध रूप से खुल रही दुकानों पर मनमानी वसूली हो रही है। मामला सामने आने पर ने पड़ताल की तो पता चला कि मझगवां के हिरौंदी देशी मदिरा की दुकानों पर रेट ही नहीं है लगी है, जिसके चलते शराब दुकान के कर्ताधर्ता मनमाने रुपए वसूल रहे हैं। खास बात यह है कि आमदिनों में भी आबकारी अधिकारी दिखावे की कार्रवाई करते हैं, जबकि पुलिस बड़े-बड़े मामले पकड़ लेती है। बताया जा रहा है कि लॉकडाउन में अवैध शराब कारोबारियों के हौंसले बुलंद होने लगे हैं।
मझगवां तहसील के हिरौंदी गांव स्थित शराब दुकान पर जब दुकानदार से पूछा कि रेट क्या है कहा है तो उनका कहना था कि हमने आज तक रेट यही है। अधिकतर ग्राहकों को शराब के रेट पता होते हैं और जिन्हें नहीं पता होते हैं उन्हें हम बता देते हैं। जब दुकान के कर्मचारियों से पूछा कि आप लोग एमआरपी से ज्यादा रेट में शराब बेच रहे हैं तो उन्होंने बताया कि हमारे ठेकेदार से बात कर लीजिएगा जब दुकान कर्मचारियों से पूछा कि रेट लिस्ट दिखाओ तो उन्होंने स्पष्ट कह दिया कि शासकीय नियम पर है रेट लिस्ट का होना मैं मानता हूं मगर हमको हमारे ठेकेदार का नियम पालन करना पड़ता है।

आबकारी को क्यों नहीं दिखती कमी-पेशी

80 की जगह 100 तक की हो रही वसूली बियर 180 की 250 तक कि दे रहे है

हिरौंदी शराब की दुकानें इन दिनों उदाहरण के तौर पर जब लाल प्लेन का क्वार्टर पर अधिकतर बिक्री मूल्य 80 एमआरपी का रेट देखा तो पता चला कि वह 90 रुपए का आता है। खास बात यह है कि लोग सब्जी, दूध, दवाईयों को लेकर एक-दो रुपए का हिसाब करते हैं, लेकि न शराब की बोतल खरीदते समय अपनी जेब की ओर नहीं देखते हैं, जिसका फायदा शराब ठेके दार मिल जाता है। दूसरा यह कि शराब की मनमानी वसूली पर कोई आवाज भी नहीं उठाता है इसलिए एमआरपी से ज्यादा वसूली करने में दिक्कतें नहीं आती है। कु छेक लोग विरोध जरुर करते हैं, लेकि न उन्हें समझा दिया जाता है कि लॉकडाउन के चलते भाव बढ़ गए हैं और वे आसानी से बात मानकर चले जाते है हिरौंदी की बहुत बड़ी समस्या बनी हुही है।

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