मण्डला दर्पणमध्य प्रदेश

शिक्षा के विकास पर सरदार पटैल विश्वविद्यालय की महत्वपूर्ण भूमिका:खेलावन

कॉलेज में हुआ सम्मान समारोह

मण्डला। सरदार पटैल ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशन खैरी में रविवार को सम्मान समारोह का आयोजन किया गया। यहॉ पर मप्र शासन के राज्यमंत्री राम खेलावन पटैल स्वतंत्र प्रभार पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक कल्याण विभाग विमुक्त घुम्मकड़ एवं अद्र्धघुम्मकड जनजाति कल्याण विभाग राज्यमंत्री पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग एवं सतना सांसद गणेश सिंह, रीवा मउगंज विधायक प्रदीप पटैल, केन्द्रीय इस्पात राज्यमंत्री फग्गन सिंह कुलस्ते, राज्यसभा सांसद श्रीमति सम्पतिया उईके, राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ सतना के पूर्व प्रचारक सतीश शर्मा एवं श्रीमति उषाकिरण का शॉल श्रीफल और स्मृति चिन्ह से सम्मान किया गया। सर्वप्रथम मुख्य अतिथियों द्वारा मां सरस्वती और सरदार पटैल के तैल्यचित्र पर माल्र्यापण कर दीप प्रज्वालित किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता इंजी. दिवाकर सिंह कुलाधिपति सरदार पटैल विश्वविद्यालय बालाघाट ने की। उन्होंने सभी मुख्य अतिथियों का स्वागत कर अभिवादन किया। इस अवसर पर राज्यमंत्री श्री पटैल ने कहा कि शिक्षा के क्षेत्र में सरदार पटैल विश्वविद्यालय का बड़ा नाम हैं संस्था के द्वारा शिक्षा को लेकर जो प्रयास किए जा रहे हैं उसका लाभ हर वर्ष सैकड़ो छात्रों को मिलता हैं अच्छी शिक्षा के लिए अच्छा वातावरण का होना आवश्यक है जो इस कॉलेज में दिखाई देता हैं। उन्होंने मिले सम्मान को लेकर अभार व्यक्त किया। इस अवसर पर सांसद श्री सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने नई शिक्षा नीति लाकर देश के विकास में और शिक्षा के क्षेत्र में नई क्रांति का आगाज किया है। नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति लाई गई जिसे सभी के परामर्श से तैयार किया गया है। इसे लाने के साथ ही देश में शिक्षा पर व्यापक चर्चा आरंभ हो गई है। शिक्षा के संबंध में गांधी जी का तात्पर्य बालक और मनुष्य के शरीर, मन तथा आत्मा के सर्वांगीण एवं सर्वोत्कृष्ट विकास से है। इसी प्रकार स्वामी विवेकानंद का कहना था कि मनुष्य की अंर्तनिहित पूर्णता को अभिव्यक्त करना ही शिक्षा है। इन्हीं सब चर्चाओं से देखेंगे कि 1986 की शिक्षा नीति में ऐसी क्या कमियाँ रह गई थीं जिन्हें दूर करने के लिये नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति को लाने की आवश्यकता पड़ी। वहीं केन्द्रीय इस्पात राज्यमंत्री श्री कुलस्ते ने कहा कि सरदार पटैल विश्वविद्यालय से उनका पुराना नाता है शिक्षा के क्षेत्र में विश्वविद्यालय की महत्वपूर्ण भूमिका है इस कॉलेज में अध्ययनरत छात्रों को महत्वपूर्ण जॉबों में देखा जा रहा है। नई शिक्षा नीति 2020 के तहत 3 साल से 18 साल तक के बच्चों को शिक्षा का अधिकार कानून 2009 के अंतर्गत रखा गया है। 34 वर्षों पश्चात् आई इस नई शिक्षा नीति का उद्देश्य सभी छात्रों को उच्च शिक्षा प्रदान करना है जिसका लक्ष्य 2025 तक पूर्व प्राथमिक शिक्षा 3-6 वर्ष की आयु सीमाद्ध को सार्वभौमिक बनाना है। वहीं इंजी. दिवाकर सिंह ने कार्यक्रम के समापन पर अभार व्यक्त करते समय कहा कि डिजिटल शिक्षा संसाधनों को विकसित करने के लिये अलग प्रौद्योगिकी इकाई का विकास किया जाएगा जो डिजिटल बुनियादी ढाँचे, सामग्री और क्षमता निर्माण हेतु समन्वयन का कार्य करेगी। केन्द्र और राज्यसरकार से मिल रहे दिशा-निर्देशों के तहत विश्वविद्यालय का संचालन किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि सरदार पटैल विश्वविद्यालय महाकौशल का प्रथम प्राईवेट विश्वविद्यालय है जहॉ पर स्वच्छ वातावरण के साथ ही शिक्षा के साथ रोजगार का लक्ष्य तय किया गया है। कार्यक्रम के आंरभ में अतिथियों का स्वागत बेच लगाकर किया गया। इस अवसर पर विशिष्ट अतिथि के तौर पर वीरेश्वर सिंह प्रो. चांसलर सरदार पटैल विश्वविद्यालय बालाघाट उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन आशीष ज्योतिषी प्रशासनिक अधिकारी सरदार पटैल गु्रप ऑफ इंस्टीट्यूशन ने किया। इस अवसर पर जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमति सरस्वती मरावी, जिला पंचायत उपाध्यक्ष शैलेष मिश्रा, भाजपा नगर अध्यक्ष अनुराग बिट्टू चौरसिया, बालकिशन खण्डेलवाल, प्रफुल्ल मिश्रा, जयदत्त झा, सुधीर दुबे, सुधीर कसार, राकेश अग्रवाल, आशीष अग्रवाल, नीरज अग्रवाल, स्माईल खान, विपिन राय, पुहुपसिंह भारत, डीडी साहू, नीरज मरकाम, सुनील मिश्रा, बब्बल खरया, भोजराज भोजू, पारस असरानी, तनुजा शर्मा, क्षमा चंद्रौल, दीप्ती कुशराम, समीक्षा तिवारी, हेमन्त पटैल, सतेन्द्र कछवाहा, प्रवीण सिंगराहा, ललिता पटैल, सविता तुमराली, संदीप सिंधिया, संतोष तिवारी, गुंजन अग्रवाल के साथ गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।

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