भ्रष्टाचार के टब में गोता लगा रही नगर पालिका गाडरवारा

बंद पड़े कैमरे बयां कर रहे “अंधेर नगरी चौपट राजा” की कहानी
गाडरवारा। गाडरवारा में जनप्रतिनिधियों ने बहुत बड़े बड़े वादे किए लेकिन क्या उन बादों का बाद में क्या हुआ उसको आज तक किसी ने पलटकर नही देखा , दूसरो को योजनाओं का लाभ दिलवाने वाले अधिकारी अगर खुद ही शहर के विकास का दिखावा कर अपने ही विभाग में बैठकर विकास के नाम पर भ्रष्टाचार कर रहे हों तो ये कहानी गाडरवारा शहर में बंद पड़े कैमरे बयाँ करने से नही चूक पा रहे हैं ? यदि गाडरवारा शहर की विकास की गति को कभी देखना हो तो केवल खम्बो पर “शोभा की सुपारी” की तरह लगे जंग खा रहे कैमरों को ही देख लिया करें । अपने आप को सत्यवादी हरिश्चंद्र के वंशज समझने वाले अधिकारी इन दिनों नियमो कानूनों की आये दिन धज्जियां उड़ाने पर तुले हैं ।
आपको अब इन कैमरों की उस सच्चाई से आपको रूबरू कराते है जो हमे सूत्रों से प्राप्त हुई , दरअसल शहरवासियों की सुरक्षा की दृष्टि से लगाये गए कैमरे आज यदि बन्द है तो वह अपने ही विभाग की भ्रष्ट अधिकारियों की देन है । बात कैमरों की क्वालटी व मापदंडों की करें तो जो कैमरे शहर में लगाये गए हैं वह कैमरों की क्वालटी व रेंज के हिसाब से फिट नही वैठते ।
मनमाने दामो पर खरीदे गए कैमरे , निर्धारित मापदंडों का भी हुआ उल्लंघन
सूत्रों की माने तो गाडरवारा नगरपालिका में कार्यरत रसूखदार अधिकारियों ने इन्हें मनमाने दामों पर यानी उचित मूल्य से 3 से 4 गुना महंगे दामों में खरीदे गए हैं जिस भ्रस्टाचार अपनी जेब गर्म करने में नगरपालिका गाडरवारा के हिटलर शाही करने वाले कुछ अधिकारियों का भी सहयोग है । कैमरों की वास्तविक कीमत तो कुछ और ही है , एव कैमरों के साथ लगने वाले उपकरण भी कैमरों में नही लगाए गए है जो पक्षीयो से इनको सुरक्षित बचा सके । एक दो बार इनको सुधारने के नाम पर भी महंगे महंगे बिल फाडे गए लेकिन व्यवस्था आज भी वही की वही है वल्कि सुनने में तो यहां तक आया है कि उन बिलों में से भी अधिकारी पैसे कमाने से नही चूके । इन अधिकारियों की जड़ें मानो इतनी मजबूत हों की प्रशासन इन पर कार्यवाही करने से भी डर रहा हो ये अंदर ही अंदर नगरपालिका को दीमक की तरह खोखला करते जा रहे हैं ।
अधिकारियों की संपत्ति की भी होनी चाहिए जांच
कहानी यही खत्म नहीं होती कुछ अधिकारियों ने तो नगरपालिका एवं जनता के पैसों से अनाप सनाप सम्पति तक बना डाली अगर इसकी ईओडब्ल्यू , इनकम टैक्स , तथा लोकायुक्त जांच करे तो दूध का दूध ओर पानी का पानी हो जाये । लेकिन आजादी के सत्तर वर्ष बीत जाने के बाद भी भारत देश इन भ्रस्ट एव अधिकारियों की वजह से आज भी सोने की चिड़िया बनने में कोसों दूर दिखाई देता है ।
उच्चस्तरीय जांच कमेटी को करनी चाहिए कैमरों में हुए भ्रष्टाचार की जांच
कैमरों को खरीदने एवं सुधारने में आज तक जो राशि निकाली गई व व्यय की गई उसकी तथा गाडरवारा शहर के तिराहों में लगे कैमरों की मरम्मत में आज तक कितना व्यय हुआ , मार्केट में इन कैमरों का उचित व वास्तविक मूल्य क्या है , जिस समान खरीदी के लिए पैसा निकाला गया क्या वह उपकरण उक्त स्थान पर लगा भी है या नही , कैमरों की गारंटी अवधि कितनी थी इत्यादि बिंदुओं की जांच होना आवश्यक है ताकि जिम्मेदार अधिकारियों पर भी कार्यवाही हो सके , गौरतलब है कि नरसिंहपुर जिले के बड़े आला अधिकारी जैंसे कलेक्टर , एसपी , सीएमओ , एसडीएम अभी जिले एवं गाडरवारा शहर में नए वावजूद इसके कार्यवाही ना हो पाना भी कहीं ना कहि अनेको सवाल खड़े करता है ।
इनका कहना है -:
(1) . में देखता हूं मेरे पास यदि बजट होगा तो करेंगे , अभी मेरे पास इस टाइप की कोई फाइल नही आई है दिवाली बाद देखता हूँ क्यूँकि मैंने कोई अध्ययन नही किया फाइल का इसलिए नही बता सकता हूँ ।
ए.के. सिंह अहिरवार मुख्य नगर पालिका अधिकारी गाडरवारा
(2) . पांच दिन पूर्व हमने नगर पालिका गाडरवारा को कैमरों के सुधार कार्य के लिए पत्र लिखा है क्यूँकि यह कार्य नगर पालिका का है ।
अजय सनकत थाना प्रभारी गाडरवारा



