मध्य प्रदेशरीवा दर्पण

आटोनामी से किनारा करने की तैयारी, गंभीर हुए हालात


नियमित प्राध्यापकों पर ईओडब्ल्यू शिकंजा कसने तैयार
रीवा दर्पण। विंध्य प्रदेश की पहचान में शामिल शासकीय ठाकुर रणमतसिंह महाविद्यालय में भूचाल लाने का करिश्मा किसी और ने नहीं बल्कि स्वयं विकास पुरुष ने कर डाला है। राजनैतिक फील्ड के नंबर वन खिलाड़ी ने ही शासकीय ठाकुर रणमतसिंह महाविद्यालय में पदस्थ नियमित प्राध्यापकों की हालत खराब कर दी है। मास्टरमाइंड तरीके से विकास पुरुष ने टीआरएस कालेज में पदस्थ लगभग सभी नियमित प्राध्यापकों को एक ऐसे झमेले में फंसा दिया है जहां से निकल पाना उनके लिए बिल्कुल आसान नहीं है। बस यही वह सबसे बड़ी वजह है जिसके कारण अब टीआरएस कालेज के अधिकांश नियमित प्राध्यापक आटोनामी से किनारा करने की योजना बना चुके हैं। यदि नियमित प्राध्यापकों ने एक साथ टीआरएस कालेज की आटोनामी से मुंह फेर लिया तो मध्यप्रदेश के नामचीन संस्थान का विधिवत संचालन कैसे हो पाएगा? प्रभारी प्राचार्य की जिम्मेदारी संभालने वाले प्राधयापक के लिए बहुत जल्द शासकीय ठाकुर रणमतसिंह महाविद्यालय का निर्बाध संचालन सबसे बड़ी चुनौती साबित होने वाला है। टीआरएस कालेज में तैनात नियमित प्राध्यापकों के लिए अब नौकरी करना तक दुभर हो गया है। नियमित प्राध्यापकों के लिए सबसे बड़ा टेंशन विकास पुरुष का प्रायोजित अटैक बन गया है। आर्थिक अनियमितता के मामले में फंसाए गए नियमित प्राध्यापक यह नहीं समझ पा रहे हैं कि आखिर उन लोगों ने विकास पुरुष का क्या बिगाड़ा है जो उनके इशारे पर सभी को आरोपी बना दिया गया है? टीआरएस कालेज के वजूद की जान आटोनामी को माना जाता है, ऐसे में यदि नियमित सभी प्राध्यापक किनारे हो जाएंगे तो भला सिस्टमैटिक व्यवस्था कैसे कायम रह पाएगी? कुल मिलाकर तेजी से विकास करने वाले टीआरएस कालेज को पुराने बद्तर हालातों में पहुंचाने का षड्यंत्र हावी है। ऐसे में वर्ष 2021 के दौरान टीआरएस कालेज के प्रस्तावित नैक मूल्यांकन के परिणाम सीधे तौर पर प्रभावित होंगे? पिछले तीन मूल्यांकन की अग्नि परीक्षा में टीआरएस कालेज ने ए ग्रेड हासिल किया था।

परीक्षा भुगतान लेने वाले प्राध्यापकों की अब खैर नहीं?
जिला कलेक्टर, अतिरिक्त संचालक उच्च शिक्षा, मनचाही जांच करने वाले प्राध्यापकों को अपने संपूर्ण प्रभाव में लेकर विकास पुरुष ने टीआरएस कालेज के खिलाफ खुले तौर पर शंखनाद कर दिया। आटोनामी व्यवस्था के तहत संचालित होने वाले टीआरएस कालेज स्वयं परीक्षा कराने के साथ साथ मूल्यांकन कराते हुए परीक्षा परिणाम घोषित करता है। परीक्षा संबंधी कामकाज करने के एवज में सभी को कालेज प्रबंधन वेतन के अतिरिक्त भुगतान करता है। इस परीक्षा कार्य संबंधी भुगतान लेने की वजह से ही नियमित प्राध्यापकों को प्रायोजित लपेटे में लिया गया है। स्वशासी का दर्जा प्राप्त होने की वजह से परीक्षा और परिणाम दोनों पर टीआरएस कालेज का एकाधिकार है। परीक्षा संबंधी कामकाज के एवज में भुगतान हासिल करने वाले नियमित प्राध्यापकों को सुनियोजित तरीके से निशाना बनाया गया है।

ईओडब्ल्यू का कसा शिकंजा, कालेज में खिंचा सनाका
विंध्य प्रदेश के प्रसिद्ध और नामचीन टीआरएस कालेज के बढ़ते प्रभाव से घबराकर उसे अव्यवस्थित करने का षड्यंत्र रचा गया है। सबसे रोचक और मजेदार बात यह है कि सरकारी मशीनरी को पूरी तरह अपने प्रभाव में लेकर टीआरएस कालेज के खिलाफ धावा बोला गया है। माडल साइंस कालेज, जीडीसी में तैनात विकास पुरुष सर्मथक प्रोफेसरों को जांच टीम का सदस्य बनाकर एक महाभियान छेड़ा गया। राजनैतिक आका के इशारे पर जांच को अंजाम देते हुए 14.09 करोड़ रुपए आथिर्क अनियमितता का खुलासा करते हुए दो सेवानिवृत्त प्राचार्यों सहित कुल पंद्रह को आरोपी करार दिया गया। इतना ही नहीं इसके तुरंत बाद विकास पुरुष ने दूसरी चाल चली और आरोपियों के खिलाफ ईओडब्ल्यू में प्रकरण दर्ज करवा दिया। सूत्रों ने बताया कि जानबूझकर टीआरएस कालेज के सभी सीनियर प्राध्यापकों की गर्दन सिर्फ इसलिए फंसाई गई है, जिससे गलती से भी कोई सीनियर प्राधयापक प्राचार्य कुर्सी की तरफ आगे न बढ़े। शहर से लेकर गांव गांव में आम जनता मूलभूत सुविधाओं के लिए तरस रही है, उस दिशा में सोचने और कुछ करने के बजाय विकास पुरुष नहा-धोकर टीआरएस कालेज के पीछे पड़ गए हैं। विंध्य में तेजी से उभरते हुए टीआरएस कॉलेज की राह में सबसे बड़ी बाधा स्वयं विकास पुरुष बन गए हैं।

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