मण्डला दर्पणमध्य प्रदेश

पहरेदारों की घोर लापरवाही से टूटा हाथियों का जोड़ा

वनमंत्री भी नहीं बचा सके हाथी की जान, दोषियों के खिलाफ उठी जांच की मांग
मंडला।
यूं तो म.प्र. के आदिवासी बाहुल्य जिले में जनकल्याण की योजनाओं में धांधली, लापरवाही और मनमानी चरम सीमा पर पहुंच गई है लेकिन वन्य प्राणियों की सुरक्षा में भी घोर लापरवाही बरती जा रही है जो किसी भी स्थिति में उचित नहीं माना जा रहा है। काद्बक्ती लम्बे समय से मंडला जिले में हाथियों का जोड़ा उत्पाद मचा रहा था किसानों की फसल खराब हो रही थी और सम्बंधित इन्हें नियंत्रित करने की किस तरह की कोशिश कर रहे थे यह जांच का विषय हो गया है। जिसका लोगों को डर था आखिर वही हुआ हाथियों का जोड़ा टूट गया, समय रहते यदि सही कार्यवाही होती तो इनकी जान बच जाती ऐसा लोग कह रहे हैं। ज्ञात हो कि छत्तीसगढ़ से प्रदेश के तीन जिलों में भटक कर नुकसान पहुंचाने वाले हाथियों का जोड़ा अब टूट गया है। जबलपुर के डुंगरिया में हाथी का शव मिला। हाथियों के रहवासी इलाके में आने से नागरिकों और हाथियों को भी नुकसान का डर था। वनविभाग की लापरवाही के चलते हाथियों के जोड़े में से एक हाथी की मौत हो गई। जानकारों की मानें तो समय रहते सम्बंधित विभाग हाथियों को कैप्चर कर सुरक्षित रखता तो ऐसे हालात नहीं बनते। जानकारी के अनुसार करीब दो वर्ष पहले छत्तीसगढ़ से प्रदेश में आने के बाद मंडला, सिवनी और नरसिंहपुर में हाथियों का जोड़ा आतंक मचाता रहा और अंतत: एक हाथी की मृत्यु पिछले दिनों हो गई। सामान्य वनमण्डल जबलपुर के अंतर्गत बरगी रेंज के गांव डुंगरिया के पास हाथी का शव मिला। कान्हा के जंगल से भटक कर बरगी और बरेला के बीच हाथियों ने डेरा जमा लिया था। मौत के बाद हाथी मुंह के बल जमीन पर पड़ा हुआ था वजन के कारण उसके तीन से चार फिट लम्बे दांत जमीन में गड़े हुए थे। दांत न दिखने की वजह से शिकार की आशंका जताई जा रही थी। बताया जा रहा है कि इस क्षेत्र में बिजली की चोरी भी टावर लाइन के माध्यम से होती थी हाई टेंशन लाइन से बिजली लेकर उपयोग किया जाता था। हाथी की मौत के बाद चोरी के कनेक्शन गायब कर दिये गये हैं। सूत्रों से पता चला है कि पुलिस और वनविभाग संदिग्धों से पूछताछ कर रहा है मामला क्या है उच्चस्तरीय जांच पड़ताल से पता चल सकता है। कान्हा नेशनल पार्क मे वन्य प्राणी सुरक्षित नहीं हैं इसके अलावा अन्य स्थानों में भी वन्य प्राणियों की सुरक्षा खतरे में ही दिखाई दे रही है। पिछले दिनों बाघ की मौत भूख से हो गई इसके अलावा कई कारणों से भी बाघों की मौत हो रही है। अब हाथी ने जान गंवाई है इसके बाद भी सरकार द्वारा वन्य प्राणियों की सुरक्षा के लिये घोर लापरवाही बरतना समझ से परे है। अपने साथी की मौत के बाद हाथी ने फिर मंडला जिले की राह पकड़ ली थी वह बहुत तेजी से लगातार चल रहा था और उसके पीछे वन  विभाग की टीम और रेस्क्यू करने वाली टीम भी साथ में थी अब हाथी कान्हा नेशनल पार्क में वापस अपने ठिकाने पर पहुंच गया है जहां वह पिछले छह माह से अपने साथी के साथ रह रहा था लेकिन अब उसके पास उसका साथी नहीं है। उसे अकेला ही रहना होगा, ऐसी स्थिति निर्मित करने के लिए कौन-कौन जिम्मेदार है उन सभी को चिन्हित करके शासन-प्रशासन के सम्बंधित तमाम लोगों के खिलाफ दण्डात्मक कार्यवाही किये जाने की अपेक्षा अनेक लोगों द्वारा जताई जा रही है। नागरिकों की मांग है कि वन्य प्राणियों की सुरक्षा में कोताही बरतने वालों के खिलाफ कड़ी से कड़ी कार्यवाही शासन प्रशासन द्वारा की जाये। पिछले दिनों कान्हा नेशनल पार्क में वन मंत्री का आगमन हुआ था कुछ अधिकारियों को हटाने की कार्यवाही की गई, लेकिन इस कार्यवाही से नागरिक पूरी तरह संतुष्ट नहीं हैं। नागरिकों का मानना है कि कान्हा प्रबंधक सुधीर मिश्रा जो विगत कई वर्षो से यहां पदस्थ हैं, इन्हें आखिरकार क्यों नहीं हटाया जा रहा है। जांच होना चाहिए कि म.प्र. के मंडला जिले में कान्हा नेशनल पार्क के अलावा अन्य क्षेत्रों में वन्य प्राणियों की सुरक्षा के लिए क्या-क्या किया जा रहा है और कितना धनराशि खर्च की गई है व की जा रही है इसका भौतिक सत्यापन कर सत्यता सभी के सामने लाई जाये ताकि पता चल सके कि कितनी धांधली, मनमानी और लापरवाही हो रही है। जनापेक्षा है सभी दोषियों के खिलाफ शीघ्र कार्यवाही की जाये।

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