मनुष्य को यह ज्ञात होना चाहिए कि वह परमात्मा से क्या मांगेः परम पूज्य श्री माताजी

सहज योग ध्यान मानव मन को परिपक्व करता है
घर बैठै निशुल्क सीखिए सहजयोग
जबलपुर। ध्यान हमें वैराग्य सिखाता है, छोड़ना सिखाता है, देना सिखाता है, लौटाना सिखाता है। आज तक मनुष्य केवल मांगता ही आया है, कभी अपने लिए, कभी अपनों के लिए। लौकिक जीवन में कुछ ना कुछ उसे चाहिए ही होता है और जब वह परम शक्तिमान के सामने उपस्थित हो प्रार्थना को तत्पर होता है तो वही सब जो उसके दिमाग में चल रहा है जिसे वह आवश्यक समझता है वही एक के बाद एक उसकी प्रार्थनाओं का हिस्सा होता चला जाता है। जबकि वास्तव में परमात्मा को जानने के बाद, ध्यान में ईश्वर तत्व का एवं अपनी आत्मा में परम तत्व का अनुभव कर लेने के बाद मनुष्य परिपक्व मति हो जाता है। अब वह जान जाता है कि लौकिक जीवन की अनंत आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए यह प्रार्थना का अनमोल समय उसे खोना नहीं है। वास्तव में परमात्मा से परम मांगना चाहिए अलौकिक मांगना चाहिए, परंतु ध्यान के पूर्व दृष्टि के संकोच के कारण वह बड़ा नहीं सोच पाता। कूप मंडूक की तरह लौकिक जीवन की समस्याओं को ही प्रार्थना में बदलता रहता है यह सच्ची प्रार्थना नहीं होती।
सहज योग में अत्यंत सरलता से ध्यान के द्वारा आत्मा से साक्षात्कार का अनुभव होता है और हम अपने भीतर गहनता का अनुभव करते हैं यही गहनता हमारी मन बुद्धि को परिपक्व करती है गहरा करती है तब हम प्रार्थना में निर्विचार हो जाते हैं और हमारी ऐसी प्रार्थनाएं फलीभूत भी होती हैं।
उल्लेखनीय है कि वैश्विक वेब पोर्टल पर अध्यात्म का नेतृत्व करते हुए परम पूज्य माताजी श्री निर्मला देवी राष्ट्रीय सहयोग ट्रस्ट दिल्ली एवं सहयोग प्रतिष्ठान पुणे द्वारा वेब स्थली डब्लू डब्लू डब्लू डॉट सहज योगा डॉट ओआरजी डॉट इन स्लैश लाइव पर(www.sahajayoga.org.in/live) प्रतिदिन कुंडलिनी जागृती एवं ध्यान साधना के अनुभव सिद्ध प्रशिक्षण के विविध कार्यक्रम प्रस्तुत किए जाते हैं जिनके लिए कोई शुल्क नहीं लिया जाता। जिज्ञासु साधक, बालक, स्त्री-पुरुष, विद्यार्थी, युवा, वृद्ध सभी इसे कम समय में घर बैठे सीख सकते हैं। किसी भी तरह की जिज्ञासा के समाधान के लिए सहज योग के टोल फ्री नंबर 18002 700 800 संपर्क किया जा सकता है।



