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भारतीय संस्कृति का गौरव साहित्य में परिलक्षित हो।

भाषाएं संस्कृति को जीवंत रखने का कार्य करती हैं डा शंभू मनहर

राष्ट्रीय कवि संगम का महाकौशल अधिवेशन संपन्न।
जबलपुर। अब तक भारतीय संस्कृति का जो इतिहास बच्चों को पढ़ाया जाता था। उसमें भारतीय संस्कृति का वास्तविक गौरव छुपा लिया जाता था और इतिहास के वो हिस्से, जहां इस देश के नायकों महानायकों की हार हुई है, उन्हें सामने रखा जाता था। विदेशी आक्रमणकारियों का गुणगान किया जाता था। कुल मिलाकर देश के स्वाभिमान के साथ न्याय ना कर वामपंथी बुद्धिजीवियों ने देश की सनातन परंपरा के साथ विश्वासघात किया। जहां एक और जानबूझकर विदेशी आक्रमणकारियों ने भारत की सांस्कृतिक धरोहर को धराशाई करने का प्रयास किया। वहीं दूसरी तरफ इन तथाकथित बुद्धिजीवियों ने लोगों के मन पर प्रतिकूल प्रभाव वाले साहित्य और कला कृतियों का महिमामंडन किया। ऐसे कलाकारों को हमेशा से पाला पोसा गया संरक्षित किया गया।
वक्ताओं के ओजस्वी वक्तव्य को सुनकर श्रोताओं ने इसके अर्थ को आत्मसात किया। जानकी रमण कॉलेज में राष्ट्रीय कवि संगम का महाकौशल अधिवेशन हुआ। रविवार प्रातः 9:00 बजे से शुरू हुआ। मां सरस्वती की प्रतिमा के समक्ष दीप प्रज्वलन और माल्यार्पण के साथ कार्यक्रम की विधिवत शुरुआत हुई।
मनचला अतिथियों के सम्मान के बाद का उद्बोधन शुरू हुआ। जिसमें राष्ट्रीय कवि संगम के उद्देश्य पर वक्ताओं ने प्रकाश डाला। साहित्य कला के क्षेत्र में राष्ट्रवाद की भावना को आत्मा की तरह आत्मसात करने की भावना पर बल दिया। कार्यक्रम के अगले चरण में नवोदित कवियों को मंच प्रदान किया गया। जहां उन्होंने अपने कवित्त कौशल का परिचय श्रोताओं को दिया।
राष्ट्रीय कवि संगम के राष्ट्रीय संरक्षक बाबा सत्यनारायण मौर्य, राष्ट्रीय मंत्री महेश शर्मा जी, प्रदेश अध्यक्ष डॉ शम्भू मनहर, प्रदेश संरक्षक मनोहर मनोज, शशिकांत यादव, प्रदेश महामंत्री मनीष तिवारी, अभिनेष ‘अटल’ जिलाध्यक्ष अम्बर प्रियदर्शी, दीपक तिवारी दिव्य,अजय मिश्रा अजेय, राकेश राकेंदू,सूरज राय सूरज,मोहन शशि, रेखा ताम्रकार, अनिल कुमार मिश्र, मिथिलेश बढ़ गईया, कपिल चौबे सुनील कुमार अवधिया, शिव प्रसाद, एचएल माझी समेत जिलों के कवि उपस्थित हुए।

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