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किसान विरोधी हैं तीनों कृषि कानून।

किसान विरोधी हैं तीनों कृषि कानून।
किसानों ने तीनों कानूनों का किया विरोध।
जबलपुर। किसानों की हालत को सुधारने के लिए और कृषि कानूनों में व्यापक बदलाव करते हुए केंद्र सरकार ने तीन कृषि कानूनों को लागू किया है लेकिन इन तीनों कानूनों का भरसक विरोध किया जा रहा है और किसानों के साथ मिलकर विपक्ष भी इस बात की कोशिश कर रहा है कि इन तीनों कानूनों को जल्द से जल्द वापस लिया जाए विपक्ष का मानना है कि इन कानूनों का प्रयोग करके किसानों को गुलाम बनाया जा रहा है। जिसका परिणाम पूरे देश को भुगतना पड़ेगा।
किसानों को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने बताया कि केंद्र सरकार द्वारा लाए गए इन कानूनों में जो पूछते हैं कि काला क्या है उनके लिए बता दूं कि इसमें सफेद कुछ भी नहीं है। किसानों किसानों से साल 2 साल ही बड़ी-बड़ी कंपनियां महंगे दामों पर अनाज खरीदेंगी। उसके बाद किसान के अनाज में कमी निकालेंगे। इन कानूनों का कालापन वहां से नजर आएगा। एक बार फिर देश आर्थिक गुलामी की तरफ जा रहा है।
केंद्र सरकार द्वारा लाये गये तीन काले कानून के विरोध में आज किसान सम्मेलन का आयोजन पंडित वीरेंद्र चौबे जी के नेतृत्व में करमेता मे किया गया। जहा सैकड़ों की संख्या में किसान भाई बहन सम्म्लित हुये। जिसमे जिला ग्रमीण कांग्रेस अध्यक्ष राधेश्याम चौबे, सम्मति सेनी, पंडित वीरेंद्र चौबे, महिला कांग्रेस जिला अध्यक्ष संगीता सिंह विनीता यादव, राजू चौबे, सतेन्द्र चौबे (गुडडा ), मनीष पटेल, पंडित नित्यनिरंजन खम्परिया, विष्णु चौबे, रामस्वयंवर दुबे, अन्नू चौबे, राजेश चौबे, मुकेश यादव, राजेश तिवारी, मुकेश पटेल, पवन सोनी, सुभाष एवं सेकड़ो कांग्रेस कार्यकर्ता सम्म्लित हुये।

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