वन संपदा पर अधिकार हेतु ग्राम सभा को किया जाए क्रियाशील।

महा ग्रामसभा रोरिया महासंघ ने उठाई आवाज।
जबलपुर। भारत के संविधान में आदिवासियों की स्थिति को मजबूत करने के लिए, जंगल से प्राप्त होने वाले उत्पादों के प्रबंधन उनके विक्रय के अधिकार को ग्राम सभा को दिया गया है। लेकिन वास्तव में आज तक वन संपदा पर एकाधिकार वन विभाग का रहा है। जिसे लेकर आदिवासी समुदाय के लोगों द्वारा समय-समय पर मांग की जा रही है। ग्राम सभाओं का विधिवत महासंघ महा ग्राम सभा रोरिया बनाकर वन अधिकार अधिनियम 2006 नियम 2008 के प्रावधान के तहत वन संसाधनों के संरक्षण पुनर्जीवन पर प्रबंधन करने का अधिकार ग्राम सभाओं को दिए जाने के संबंध में संशोधित नियम 2012 के अनुसार जीविका की वास्तविक आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए लघु वनोपज के विक्रय का प्रयोग किया जा सकता है। ग्राम सभाओं के महासंघ लघु वनोपज का विक्रय करके अपनी परमिट प्रणाली विकसित कर सकते हैं। अधिकार प्राप्त ग्राम सभा क्षेत्र के ग्राम सभा द्वारा किया जा सकता है। इन विषयों पर अपनी मांग को लेकर वन अधिकार एक्टिविस्ट भरत नामदेव और महासभा द्वारा एक पत्रकार वार्ता का आयोजन किया गया। आदिवासियों को तेंदूपत्ता के संग्रहण और विक्रय से संबंधित अधिकार दिए जाने की बात कही गई। अगर कानूनी प्रावधानों के अधिकार अधिनियम 2006/8 के प्रावधान के तहत अधिनियम की धारा 2 संसाधनों के संरक्षण का अधिकार दिया गया है। ग्राम सभाओं में संशोधित अधिनियम 2012( 2)-3 में लिखा है कि ग्राम सभाओं का महासंघ लघु वनोपज का विक्रय कर सकते हैं और अपनी प्रमुख प्रणाली को विकसित कर सकते हैं। महा ग्राम सभा राज्य द्वारा वन अधिकार अधिनियम के तहत पूरी वैधानिक प्रक्रिया अपनाकर गठित करने जा रही है। इस पत्रकार वार्ता वन अधिकार एक्टिविस्ट भारत नामदेव के साथ बैसाखू सिंह वैभव, बहादुर सिंह, अनोद सिंह मसराम, हुब्बीलाल आर्मो, देव लाल मरावी, सुखलाल कुशराम धर्मेंद्र सिंह मरावी मौजूद रहे।



