पत्नी के दृष्टि बाधित होने पर पति ने घर से निकाला।
जनसुनवाई में पीड़ित ने लगाई प्रशासन गुहार।

जबलपुर। सनातन संस्कृति मैं पति पत्नी का रिश्ता, जन्मो जन्मो का माना जाता है। और इसी भाव से माता-पिता अपनी बेटी की शादी, किसी योग्य वर से करते हैं। लेकिन कुछ लोग ऐसे भी हैं। जो इन भावनाओं की कदर नहीं करते। पुलिस अधीक्षक कार्यालय जबलपुर में, अपनी फरियाद लेकर आई श्रीमती अंजू झारिया का विवाह 3 मई 2009 को अशोक झारिया के साथ हुआ था। वह अपने ससुराल रामपुर छापर आ गई थी। सभी रिश्तेदारों की उपस्थिति में संपन्न हुए इस विवाह में सब कुछ सही चल रहा था। साल 2011 में उन्होंने एक पुत्री नव्या झारिया जो कि वर्तमान में 10 साल की है, उसे जन्म दिया। लेकिन डिलीवरी के दौरान ही शासकीय मेडिकल चिकित्सालय में, डिलीवरी के पश्चात उनकी आंखों की रोशनी चली गई। इसके बाद उनके पति अशोक झारिया ने उन्हें, घर से निकाल दिया। बीते 10 सालों से वह मायके में ही रह रही हैं। पति का कहना था कि अब तुम अंधी हो गई हो और उसके किसी काम की नहीं हो। इसके बाद महिला ने न्यायालय की शरण ली और न्यायालय में पति ने स्वीकार किया। कि वो पत्नी को अपने साथ रखने के लिए तैयार है। इसके पश्चात पति अशोक धारिया ने उसे, वापस ससुराल तो ले गया। लेकिन फिर भी उनके व्यवहार में कोई परिवर्तन नहीं हुआ। पीड़िता को मानसिक और शारीरिक रूप से प्रताड़ित किया जाता था। पिता का कहना है कि उसके द्वारा न्यायालय में पति से भरण पोषण प्राप्त करने का आवेदन भी दिया गया था। लेकिन पति के द्वारा कोई भी भरण पोषण की राशि नहीं दी जा रही है। इस संबंध में पीड़िता ने निवेदन किया है कि, उसकी परिस्थिति को दृष्टिगत रखते हुए उसे और उसकी पुत्री के भरण-पोषण के लिए पति को समझाइश दी जाए और उचित कार्रवाई की जाए।



