लेबर पेमेंट के नाम पर,50-60 रूपए किसानों से वसूला जा रहा है।

लेबर पेमेंट के नाम पर,50-60 रूपए किसानों से वसूला जा रहा है
50 किलो का टैग लगा कर 50 किलो 500 ग्राम की कर रहे हैं तौल
जबलपुर। कोरोना काल की इन विषम परिस्थितियों में, अन्नदाता अपने कर्तव्य से विमुख नहीं है। यदि उन्होंने अपने कर्तव्य को विराम दे दिया। तो दुनिया कोरोना से मरे या ना मरे, भूख से जरूर मर जाएगी। मगर अन्नदाता की परेशानियों को समझने वाला कोई नहीं है। शासन-प्रशासन दावे तो बहुत करता है। लेकिन जमीनी स्तर पर अन्नदाता की परेशानियां क्या है? इसे जानने की उसे तो सुध ही नहीं है। तब समाधान तो बहुत दूर की बात है।
वर्तमान में गेहूं की खरीद चल रही है और किसानों को खरीदी के लिए मैसेज भेजे जा रहे हैं किसान अपना अपना माल लेकर वहां आ रहे हैं लेकिन इसके बाद शुरू होता है किसान के शोषण का सिलसिला किसानों का जो माल तोला जाता है 50-50 किलो की बोरियों में भरा जाता है इन बोरियों पर टैग 50 किलो का लगता है लेकिन कॉल के समय 50 किलो400- 500 ग्राम गेहूं लिया जाता है। खरीद केंद्रों पर किसानों को उनके गेहूं की तुलाई सिलाई और धुलाई के नाम पर 50 से ₹60 प्रति क्विंटल पैसा लिया जाता है।
बड़ा सवाल यह है कि जब लेबर पेमेंट किसानों से लिया जा रहा है। तो सरकार, लेबर पेमेंट के नाम पर जो पैसा भेजती है। वह किसकी जेब में जाता है? किसानों की सुविधा के लिए खरीद केंद्रों पर, पीने के पानी मास्क सैनिटाइजर जैसी व्यवस्थाएं होनी चाहिए। लेकिन यह तमाम व्यवस्थाएं खरीद केंद्रों से नदारद हैं।
ब्लॉक कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष और जिला कांग्रेस कमेटी के महामंत्री मनीष पटेल द्वारा इस आशय का एक शिकायती पत्र जिलाधीश महोदय को दिया गया है उन्होंने अपने पत्र में यह बात भी लिखी है कि बार-बार किसानों के द्वारा मांग करने पर भी इस समस्या की तरफ ध्यान नहीं दिया जा रहा है यदि कोई किसान इस शोषण में शामिल नहीं होता तो उसे अनावश्यक परेशान किया जाता है।



