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चौहनी मुक्ति धाम बना दलालों का अड्डा….

जबलपुर संवाददाता। शासन प्रशासन के द्वारा चोहानी मुक्तिधाम में कोविड-19 होने वाली मौतों का दाह संस्कार किया जा रहा है। इस मुक्तिधाम में लगभग 50 से 60 कोविड-19 से होने वाली मौतों का दाह संस्कार किया जा रहा है। विडंबना यह है कि शासन प्रशासन की नाक के नीचे शहर में जन सेवा कर रहे 2-3 एनजीओ है,जो लावारिस लाशों का अंतिम संस्कार निशुल्क करते हैं।अपने एनजीओ का खूब प्रचार प्रसार करते हैं। किसी को यदि इनकी सच्चाई जानना है। तो आप मेडिकल चले जाय वहां मर्चरी से ही कफन की दलाली का खेल शुरू हो जाता है। इनके द्वारा रेट फिक्स किए गए हैं। जो इनके पास अपनी मजबूरी बस आते है शायद ये हमारी मदद करेगे लेकिन ऐसा होता नही है ये उन सभी की मज़बूरी का फायदा उठाते है जिनने इस करोना आपदा के चलते अपनो को खोया है। कम से कम उनका अतिम संस्कार अच्छे से हो सके उसके लिये वह हर कीमत देने तैयार हो जाते है और इन समाज सेवियो के द्वारा 8000 से 10000 रुपये तक लिये जा रहे है। पैसा देने पर दाह संस्कार वीआईपी तरीके से किया जाता है। ऊपर से नीचे तक इसमें सभी अधिकारियों की मिलीभगत है।जिसके कारण यह सफेद कलर वाले लोग प्रशासन की नाक के नीचे इस तरह के खेल को अंजाम दे रहे हैं। कहने को तो इनके द्वारा समाज सेवा की जा रही है।परंतु सही मायने में समाज सेवा का यह मुखौटा है। इसी तरह कुछ प्राइवेट हॉस्पिटल वाले निशुल्क शव वाहन उपलब्ध करा रहे हैं। उनके शव वाहन भी चोहानी मुक्तिधाम में देखने को मिल जाएंगे उन शव वाहन के चालक भी इन एनजीओ के खेल में शामिल हैं। जिस किसी को भी सच्चाई जानना है। वह मेडिकल हॉस्पिटल और प्राइवेट अस्पतालों में जाकर स्वयं इन लोगों से सौदा कर सकते हैं। सच्चाई उनके सामने होगी, अब देखना होगा प्रशासन इस तरह के गंदे खेल में जो लोग शामिल हैं कब तक कार्यवाही करता है। इन जैसे लोगों के कारण मानवता शर्मसार हो रही है। लेकिन यह लोग तो आपदा में अवसर की तलाश में है। जिस परिवार पर यह दुखद घटना होती है फिर यह नहीं देखता है कितने पैसे कहां खर्च हो रहे हैं। और वह लोग आसानी से इनके शिकार हो जााते हैं। और यह लोग उन्हीं को टारगेट करते हैं। आजकल वैसे भी चौहानी मुक्तिधाम में फोटो लेना वीडियो बनाना सख्त मना है। पता नही यह किस नियम के द्वारा मुक्तिधाम संचालकों द्वारा बोला जाता है। मुक्तिधाम में प्राइवेट कर्मचारी जिनकी संख्या पांच से छह होती है ये लोग घूमते रहते हैं और सब पर नजर रखते हैं। वह सारे एनजीओ के लोग हैं। जो यहां पर नजर रखे रहते हैं। कहीं कोई मीडिया के लोग तो नहीं है। प्रशासन को चाहिए इन सब गतिविधियों पर रोक लगाये और जो इस मे दोषी पाए जाते हैं उनका चेहरा बेनकाब करके उन पर सख्त से सख्त कार्रवाई करे

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