बसों के परिवहन बंद होने से भुखमरी की कागार पर खड़े चालक, परिचालक

बालाघाट जिले में कोरोना महामारी के पहले लगभग सैकड़ो बसों का परिवहन होता था। जिसमें लगे चालक, परिचालक सहित ऐजेंट की रोजी-रोटी सलामत थी, लेकिन कोरोना कॉल के बाद ऐसे इन पर संकट के बादल छा गये। कोरोना महामारी को लेकर लगाये गये पहले लॉकडाउन में बसों के परिवहन बंद होने से बसो से जुड़े चालक, परिचालक और ऐजेंटों ने किसी तरह अपना जीवन यापन किया। जबकि कुछ लोगों ने काम बंद होने से अपनी जिंदगी गंवा दी। किसी तरह कोरोना काम होने से बसों के परिवहन शुरू होने से किसी तरह हालत सुधर रहे थे कि कोरोना की दूसरी लहर एक बार फिर बस परिवहन से जुड़े चालक, परिचालक और ऐजेंटो पर संकट के बादल छा गये है। बसों के परिवहन बंद होने से चालक, परिचालक और ऐजेंट घर पर बैठे है। जिनकी आवक बंद होने से अब उन्हें स्वयं और परिवार का जीवन यापन करने में परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। भारतीय मजदूर संघ से संबद्ध अखिल भारतीय मजदूर संघ के सचिव न्याजमीर खान ने जारी प्रेस बयान में कहा कि बसों के परिवहन बंद होने से चालक, परिचालक और ऐजेंट भुखमरी की कागार पर खड़े है, न तो शासन, प्रशासन से कोई मदद मिल रही है और न ही बस मालिकों से। जिसके चलते बस परिवहन से जुड़े सभी कर्मियों आर्थिक और मानसिक रूप से काफी परेशान है।
सचिव न्याजमीर खान ने बताया कि जिले में बस परिवहन से जुड़े लगभग 15 चालक, परिचालक है, इसके अलावा बसों में आवाज देकर सवारी बैठालने वाले ऐजेंटों की संख्या अलग है, जो आज बसों के परिवहन बंद होने से हाथ पर हाथ धरे बैठे है, आवक नहीं होने से उन्हें दैनिक जीवनयापन करने में परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
श्री खान ने कहा कि सरकार ने निर्देश जारी किये है, गरीबों को तीन माह का राशन दिया जायेगा, लेकिन वह भी नहीं मिल रहा है, लेकिन केवल क्या चांवल और गेंहू ही खायें। जो भी कई चालक, परिचालक को नहीं मिल रहा है, ऐसी स्थिति में वह अपना जीवन कैसे चलाये? यह सवाल खड़ा हो गया है। उन्होंने बताया कि पूर्व लॉकडाडन में मुख्यमंत्री से लेकर जिला प्रशासन तक संगठन के माध्यम से बसों के चालक, परिचालक और ऐजेंटो को राहत पहुंचाने की मांग की गई थी। जिसमें राशन के लिए चालक, परिचालक और ऐजेंट वर्ग को पात्रता पर्ची दिलाकर लाभ दिलाने की बात कही गई थी, लेकिन अधिकंाश लोगों को इसका लाभ नहीं मिला। जब पता किया गया तो पता चला कि भोपाल से वेरिफिकेशन नहीं हो पाया है, आज चालक, परिचालक और ऐजेंटों की दैनिक स्थिति काफी खराब है, वह स्वयं और परिवार का पालन-पोषण कैसे करें, यह समझ नहीं आ रहा है।
कोरोना संक्रमण के बढ़ते प्रभाव को लेकर शासन, प्रशासन द्वारा लॉकडाउन निरंतर बढ़ाया जा रहा है, लेकिन शासन, प्रशासन को गरीब वर्गो की तरह बस परिवहन से जुड़े चालक, परिचालक और ऐजेंटों और उनके परिवार की भी चिंता करनी चाहिये। हम शासन और प्रशासन द्वारा कोरोना संक्रमण की चेन तोड़ने किये जा रहे उपायों के साथ है और अपील भी करते है कि कोरोना संक्रमण की चेन तोड़ने कोई भी घर से बाहर नहीं निकले, मॉस्क लगाकर रखे और सोशल डिस्टेंस का पालन करें। शासन और प्रशासन यह भी अपील करते है कि जो भी व्यक्ति बाहर से आ रहा है, उसकी जांच करवाकर कोरोना प्रोटोकॉल के तहत उसका ईलाज करायें।
भारतीय मजदूर संघ संबद्ध अखिल भारतीय चालक परिचालक मजदूर संघ सचिव न्याजमीर खान ने शासन, प्रशासन से अपील की है कि वह चालक, परिचालक और ऐजेंटो के परिवार के प्रति मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए उनके जीवनयापन के लिए राहत राशि या राहत सामग्री की व्यवस्था करें, ताकि वह भी इस महामारी की आपदा में किसी तरह अपना जीवन यापन कर सकें।



