धनलक्ष्मी कंपनी कर रही रेत का अवैध उत्खनन, जानकारी के बावजूद जिम्मेदार नहीं कर रहें कार्यवाही

नरसिंहपुर दर्पण। जिले में रेत का कारोबार करने आई धनलक्ष्मी कंपनी ने इतना धन बरसाया की प्रशासनिक अधिकारियों पर की वे इस पर कोई कार्रवाई नहीं कर हे. सूत्रों की माने तो नरसिंहपुर जिले में सिर्फ 36 रेत खदानें नियम से आवंटित है लेकिन पूरे नरसिंहपुर जिले की छोटी-छोटी रेत की नदियों पर अपने रसूखदार गुंडों को बैठाकर मुंह मांगे दामों पर रॉयल्टी के नाम पर कंपनी द्वारा वसूली की जा रही है.बताया जा रहा है कि तेंदूखेड़ा तहसील में सिर्फ दो खदानें आवंटित है. ककराघाट और इमझिरा, लेकिन धनलक्ष्मी कंपनी अपने रसूखदार गुंडों से नर्मदा नदी के छतरपुर घाट, सिमरिया घाट, करहैया घाट, नैनबारा घाट, छोटी नदिया गगई, टेकापार, काचरकोना, खमरिया पर 1000 रूपये पर ट्राली, बिना रॉयल्टी के वसूल कर रही है ओर साहाबन स्टॉक की रॉयल्टी दे कर 2000 रु ट्राली वसूल रही है। ऐसे में प्रशासन को कई बार इससे अवगत कराने के बाद भी प्रशासन की आंखें बंद है।

अवेध उत्खनन कर स्टॉक की रॉयल्टी पर दूसरे जिलो में कर रहे रेत सप्लाई..
धनलक्ष्मी मार्चेंडाइज प्राइवेट लिमिटेड द्वारा ठेका लेकर अवैध घाटों से असीमत रेत खनन किया जा रहा है। धनलक्ष्मी ओर नरसिंहपुर के रेत ठेकेदार मिलकर चोरी की रेत को उदयपुरा और सिलवानी के रास्ते रायसेन ,भोपाल ओर सागर पहुंचा रहे हैं। रेत ठेका लेने वाली कंपनी धनलक्ष्मी नरसिंहपुर जिले से रेत का असीमित रूप से अवैध खनन कर रही है। प्रशासन और पुलिस के अधिकारियों की जानकारी में सब कुछ है, लेकिन सरकार के दबाव में और सांठगांठ के चलते किसी भी तरह की कार्रवाई नहीं की जा रही है।
अवैध रेत निकालकर किए भण्डारण…
नरसिंहपुर जिले के रेत समूह का ठेका लेने वाली कंपनी धनलक्ष्मी द्वारा कई अवैध घाटों से रेत निकालकर कई स्थानों पर भण्डारण भी कर लिए हैं। लेकिन कंपनी अभी भी कई घाटों से रेत निकालकर बेच रही है।
निर्धारित सीमा से बाहर से कर रहे रेत का अवैध उत्खनन..
धनलक्ष्मी कंपनी द्वारा सबसे अधिक राजस्व की चोरी से इंकार नहीं किया जा सकता। नदियों से रेत खदान की आड़ में कंपनी द्वारा खदानों की सीमाओं को लांघकर निर्धारित सीमा से अधिक रेत का खनन कर रहे हैं। यही नहीं कुछ स्थानों पर बिना विभागीय प्रक्रियाओ को पूर्ण किएखनन भी आरम्भ कर दिया है।खनन में नदियों की धारा को प्रभावित किए बिना निर्धारित मात्रा में भी खनन किया जाना है। लेकिन विभागीय निर्देशों की अनदेखी करते हुए कंपनी कर्मी रेत का अवेध खनन आंखें मूँदकर कर रहे हैं। जानकारों का मानना है कि नरसिहपुर जिले की नर्मदा नदी, दूधी, सितारेवा ओर शक्कर सहित अन्य नदियों से रेत अवैध तरीके से निकाली जा रही हैं। इनमें विभागीय परिमाप किया जाए तो रेत के अवैध उत्खनन के दर्जनों प्रकरण सामने आ सकते हैं।
ओवरलोड डंफर ओर ट्रक उड़ा रहे सड़को के परखच्चे…
रेत की खदानों से ओवरलोड वाहनों का निकलना बंद नहीं हो रहा है। क्षमता से अधिक रेत से भरकर निकलने वाहनों से पांच साल तक की गारंटी वाली सड़कें पांच महीने में ही जवाब दे रही हैं। चाहे एमपीआरडीसी और पीडब्ल्यूडी द्वारा बनवाई गईं सड़के हो या फिर प्रधानमंत्री ग्राम सड़कें। पांच-सात महीनों में ही पगडंडी का रूप ले लेती हैं। खास बात यह है कि ग्रामीणों द्वारा समय समय पर ओवरलोड वाहनों पर रोकने के लिए ज्ञापन दिए गए। शिकायतें की गईं लेकिन कार्रवाई नहीं होती है।
कार्रवाई न होने से ओवरलोड वाहनों का निकलना बंद नहीं हो रहा है। इससे शासन का करोड़ों रुपया जो कि सड़कों के निर्माण में लगाया गया, बर्बाद हो रहा है। भोपाल में बैठे मंत्रियों की सह ओर जिले के आला अधिकारियों की मिली भगत के कारण गौण खनिज का अवैध खनन और भंडारण जारी है. जिससे राजस्व को करोड़ों का घाटा हो रहा है. अब देखना होगा कि हमेशा कार्रवाई का राग आलापने वाले अधिकारी कब तक कार्रवाई करते हैं.।



