नहर में तैरता मिला वन्यप्राणी बाघ का शव

वारासिवनी परियोजना परिक्षेत्र कार्पोरेशन के जंगल के पास आज सुबह एक बाघ की लाश मिलने से क्षेत्र में सनसनी फैल गई। मृतक वन्यप्राणी लगभग तीन साल का बताया जा रहा है। जो राजीव सागर परियोजना की नहर के किनारे मिली है। वन्यप्राणी के मिले शव के मुंह पर खून लगा है और पेट फुला नजर आ रहा है।
वारासिवनी से 25 किलोमीटर दूर स्थित खड़गपुर और पौनेरा ग्राम के बीच की नहर मंे वन्यप्राणील बाघ का शव तैरता दिखाई दिया। चिखला की ओर से नहर में आते पानी में बाघ का शव सबसे पहले नहर के पानी में तैरता देखा गया। जिसका शव कुछ देर बाद नहर किनारे दिखाई दिया। वन्यप्राणी के शरीर में कोई चोट के निशान नही होने से शिकार की संभावना से इंकार किया जा रहा है, लेकिन वन्यप्राणी की मौत की वजह अब भी अनसुलझी है। बताया जाता है कि अंसेरा के आसपास पिछले कई दिनो से एक मादा और दो बडे़ शावको के देखा गया था। इन जोड़ो में से ही संभवत एक बडे शावक का शव होने की बात कही जा रही है।
पेंच और कान्हा नेशनल पार्क के सोनेवानी कॉरिडोर से संबधित ही कक्ष क्रमांक 543 आता है जहां वन्यप्राणी बाघ का शव मिला है। वनविभाग के सूत्रों की मानें तो यह बाघ के मौत लेकर संभावना जताई जा रही है कि संभवतः शिकार के दौरान बाघ ने किसी जहरीली दवा का सेवन कर लिया होगा या फिर शिकार के बाद अत्यधिक मात्रा में मांस सेवन किया होगा। बहरहाल पीएम रिपोर्ट और जांच के बाद ही बाघ की वास्तविक मौत से पर्दा हट सकेगा।
घटना की जानकारी लगते ही वारासिवनी वन परिक्षेत्र एवं कार्पोरेशन की टीम घटनास्थल पहुंची और डाग स्कॉड की भी मदद से घटनास्थल की बारिकी से जांच की। दूसरी ओर कान्हा उद्यान से भी विशेशज्ञो की टीम घटना स्थल पहुंची है। वन अधिकारियो के अनुसार टाईगर के शव परीक्षण एवं विसरा जांच रिपोर्ट के बाद ही मौत की वजह साफ हो पायेगी।



