मानव अधिकारों की रक्षा हेतु, दायर की गई याचिका।

मानव अधिकारों की रक्षा हेतु, दायर की गई याचिका
राज्यसभा सांसद विवेक तंखा ने बुलंद की आवा
जबलपुर। कोविड-19 की परिस्थितियां और भी विषम हो गई। जब से काली फफूंद यानी ब्लैक फंगस ने पैर पसारना शुरू किया है। यह एक खतरनाक और जानलेवा बीमारी है। अगर इससे मरीज की जान बच भी जाए। तो मरीज के, अपाहिज होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। कोविड-19 की अपेक्षा इसमें मृत्यु दर भी ज्यादा है। ऐसी स्थिति में सावधानी और सतर्कता को ध्यान में रखते हुए,शीघ्र ही ठोस प्रयास किए जाने की जरूरत है। ताकि हम मानवता की रक्षा कर सकें। मानव के जिंदा रहने के अधिकारों की रक्षा कर सकें। प्रथम विश्ययुद्ध के संभवतः सौ वर्षों बाद हमारे सामने ऐसा कठिन समय आया है। जब विश्व में कोविड-19 की फैलाई गयी तबाही से मानवता फिर खतरे में हैं| हमारा प्रशासनिक ढांचा पूरी मेहनत और लगन से इससे उबरने में लगा हुआ है| डॉक्टर, पैरामेडिकल स्टाफ, शासकीय और निजी अस्पताल, हमारे फ्रंटलाइन वर्कर्स, पुलिस प्रशासन और अनगिनत योद्धाओं के लिए आज स्थिरता का कोई अस्तित्व नहीं, सभी अपने कर्तव्यपथ पर डटे हुए है। जो वो किसी मुसीबत से नहीं डरते, हमारे लिए बस मेहनत करते हैं|
एक के बाद एक महामारी पीछे लगी हुई है। मानो वह हमारी व्यवस्थाओं की परीक्षा ले रही हो | कोविड-19 के साथ अब म्यूकरमाइकोसिस -ब्लैक फंगस के भी मामले सामने आने लगे है | इंदौर, भोपाल और जबलपुर जैसे शहरों में इससे बड़ी संख्या में मरीज मर रहे हैं | कोरोना में 1-2% प्रतिशत की मृत्युदर की अपेक्षा इसमें मृत्युदर 55% तक है | इसकी दवा बाजारों में सर्वसुलभ नहीं है | प्रशासनिक व्यवस्थाएं कम पड़ रही हैं जिसकी आड़ में अव्यवस्था फैलती जा रही है। चाहे वह चिकित्सा का क्षेत्र हो या फिर नागरिक आपूर्ति जैसा महत्वपूर्ण क्षेत्र। सरकारी अस्पतालों में डॉक्टरों, नर्सो की कमी, ऑक्सीजन और वेन्टीलेटरो की कमी, दवाइयों की कमी की आड़ में नकली दवाईयों की सप्लाई जैसी कितनी ही समस्याओं से प्रदेश जूझ रहा है। प्रशासनिक व्यस्तता की आड़ में मानवता के दुश्मन तैयार हो गए है जिनका उद्देश्य सिर्फ मुनाफा कमाना है| इन दुश्मनों द्वारा शुरू की गयी नकली दवाओं और इंजेक्शन की सप्लाई भारी तबाही ला सकती है|
विश्व जानता है कि आज दुनिया में शक्तिशाली लोगों के बीच, आम जनता सुरक्षित ढंग से इसलिए रह पा रही है। क्योंकि उसके साथ मानवाधिकार है। ज्ञात है कि द्वितीय विश्वयुद्ध के पश्चात युद्ध की विभीषिका झेल रहे निरपराध लोगों को, न्याय दिलाने के लिए सार्वभौमिक मानवाधिकार के अपने जन्म के समय से आज तक, जब भी असहाय और निर्दोष पर संकट आया तो मानवाधिकार रक्षकों ने उसकी रक्षा की|
आज ठीक वैसा ही समय है जब एक बार फिर जीवन और स्वतंत्रता खतरे में है तो मानवाधिकारों के संरक्षक चुप कैसे बैठ सकते हैं| आज सिर्फ कोरोना और ब्लैक फंगस के मरीज ही नहीं वरन, दूसरी गंभीर बीमारियों से जूझ रहे मरीजों का ख्याल रखना भी आवश्यक है| प्रदेश में कई मरीजों को जरूरी दवाईयां नहीं मिल पा रही हैं| अस्पतालों में मरीजों को नकली इंजेक्शन दिए जा रहे हैं। जिससे उनकी मौतें हो रही है| पता ही नहीं चल रहा की मौत बीमारी से है या नकली दवाओं से| कोई आंकड़े नहीं है| अस्पतालों में बिस्तर कम पड़ रहे हैं| बाहर बैठे मरीज बिस्तर पर लेते मरीजों के मरने का इन्तजार कर रहे है ताकि उन्हें बिस्तर मिल पाए| जब कोरोना से जूझ रहा पिता, अपनी आखिरी सांसें बच्चों के लिए सुरक्षित रख रहा है। तो पिता और बच्चे दोनों की ठहरती हुई सांसों को वापस लाने गारंटी ही मानवाधिकार है| अन्यथा खाली हाथ लौटे मानवाधिकार का कोई अस्तित्त्व नहीं|
पता नहीं ये महामारी कब तक हमारा इम्तहान लेगी| लडाई अभी लम्बी है| प्रदेश में जब नकली दवाओं की तस्करी चरम पर है और सही दवा मरीजों की पहुँच से दूर है।
मानवता के दुश्मनों ने नकली बाजार की एक सामान्तर व्यवस्था खड़ी कर ली है। शासकीय एवं निजी क्षेत्र सही मरीजो के इलाज के सही आंकड़े तक उपलब्ध नहीं करा पा रहे है। तो ऐसे समय में मानवाधिकार का हस्तक्षेप आवश्यक हो जाता है| यह वक्त है जब जिलों के जिलाधीशो और सम्बंधित शासकीय और निजी क्षेत्र के जिम्मेदार अधिकारियों से प्रतिदिन एवं समय-समय पर रिपोर्ट मंगवाकर और उन्हें आवश्यक दिशा-निर्देश देकर एवं आवश्यकता पड़ने पर उन्हें आवश्यक सहयोग भी देकर सुनिश्चित करें कि कोरोना, ब्लैक फंगस और अन्य गंभीर बीमारियों से ग्रसित मरीजों को सही दवाइयां और समुचित इलाज मिल रहा है। संकट के समय में सारा प्रशासन, प्रदेश की जनता और हम सभी आपको। सभी संभव सहयोग का आश्वासन देते है और मानवाधिकारों की रक्षा हेतु आपके संरक्षण की आशा करते हैं



