जबलपुर दर्पणमध्य प्रदेश

भीगता गेहूं, डूबता किसान, कान में तेल डाल कर, बैठ गए साहिबान।

भीगता गेहूं, डूबता किसान, कान में तेल डाल कर, बैठ गए साहिबान।
किसानों का आरोप व्यापारियों को दिए जा रहे हैं बार दाने।
दीपक तिवारी की स्पेशल रिपोर्ट।
जबलपुर। किसान लुटता रहा, अफसर देखते रहे। कभी बार दाने की कमी, कभी बारिश की मार, कभी माल रिजेक्ट हो गया। तो कभी सेलेक्ट होकर,तुल गया तब भी पर्ची नहीं मिल रही। किसानों की समस्याएं हजारों हैं इन समस्याओं पर राजनीति होती है इन समस्याओं के बल पर भ्रष्टाचारी अफसर पलते हैं। समितियों के प्रबंधकों की अपनी समस्याएं हैं किसानों की अपनी समस्याएं हैं अफसरों के अपने बहाने हैं और खरीद केंद्रों में किसानों के लिए जरुरत से कम बार दाने हैं।
मयंक वेयरहाउस,चरगंवा।
यह हाल है वर्तमान में चल रही गेहूं खरीद का गेहूं खरीद केंद्रों पर कोविड-19 के प्रोटोकॉल के क्या कहने। सोशल डिस्टेंसिंग, मास्क, सैनिटाइजेशन जैसे शब्दों का यहां कोई अर्थ नहीं रह जाता।
वर्षों से चली आ रही किसानों के शोषण की परंपरा अब भी जारी है।
पूरे क्षेत्र में बारिश हो रही है खुले में गेहूं भीग रहा है जिस किसान का गेहूं तुल गया है वह तोल पर्ची के लिए भटक रहा है। जिस किसान का गेहूं तुल नहीं पाया है। वह बार दाने के लिए तरस रहा है। किसानों को खरीद केंद्रों पर माल लाने के लिए एक समय सीमा मिलती है और उस तय समय सीमा में जब किसान वहां माल लेकर आते हैं तो उन्हें कह दिया जाता है कि बारदाना नहीं है वह अपना माल वही एक तरफ रख कर बैठ जाते हैं और बारदाना मिलने तक माल के तुल कर वेयरहाउस में रखे जाने तक। अपने माल की देखरेख करते हैं। कई किसान ऐसे हैं जिनके एसएमएस के अनुसार तुलाई की समय सीमा निकल चुकी है लेकिन उन्हें बारदाना ही नहीं मिला।
वह आज भी बाढ़ आने के इंतजार में खरीद केंद्र में अपना गेहूं लेकर बैठे हैं बारिश हुई और उनका गेहूं भीग गया अब उसे सुखाने की कोशिश में लगे हैं लेकिन बारदाना मिलने की अब भी कोई उम्मीद नहीं है।
यह हालात हैं चरगवां स्थित मयंक वेयरहाउस में चल रही खरीदी के। यहां पर मौजूद एक किसान संतोष पटेल ने बताया कि प्रभारी और प्रबंधकों की मिलीभगत से व्यापारियों को बड़ी संख्या में बार दाने दे दिए जाते हैं उनका माल कॉल कर रखवा दिया जाता है लेकिन किसानों को बता दिया जाता है कि बारदाना ही नहीं है। हालांकि मयंक वेयरहाउस में अब खरीद बंद हो गई है केवल जो माल रखा गया है उसका ही प्रबंधन किया जा रहा है लेकिन खुले में स्टेक लगे हुए गेहूं के बोरे भीग रहे हैं कुछ फट रहे हैं।
इन सवालों को लेकर जब खरीद केंद्र के प्रभारी दुष्यंत त्रिपाठी से बात की गई तो उनका कहना था कि किसानों के द्वारा लगाए गए आरोप झूठे हैं। किसानों को रजिस्ट्रेशन के आधार पर बार दाने दिए जाते हैं। जो भीगता हुआ गेहूं मैदान में रखा हुआ है। वह एफसीआई द्वारा खरीदा जा चुका है और गाड़ियों में भरकर वेयरहाउस में पहुंचाया जा रहा है। जो बोरिया फट गई है। उनमें बिखरे हुए गेहूं को उठाकर उसकी आपूर्ति की जा रही है।

नयागांव ओपन कैप खरीद केंद्र।
यहां के हालात तो बद से बदतर हैं।
तुले हुए गेहूं के जो स्टैक लगाए गए हैं। उनके नीचे कोई भी त्रिपाल, पॉलिथीन पन्नी, कुछ भी बिछाने की जहमत,केंद्र प्रभारियों ने नहीं उठाई। सीधे जमीन पर ही स्टैक लगा दिया। जब पानी आया तो नीचे वाली बोरियों की एक परत भीगी और ऊपर की बोरियों की भी एक परत भीगी। यानी प्रभारियों को इससे कोई लेना-देना नहीं, कि गेहूं भीग रहा है या बचा हुआ है।
कहीं भरे हुए पानी के बीच गेहूं की बोरियां रखी हुई है, गेहूं में नमी जा रही है। किसानों के बिना तुले हुए माल भी रखे हुए हैं। किसान अपने भीगे हुए गेहूं को सुखाने की जुगत लगा रहे हैं। इनका कहना है कि पिछले महीने इनको एसएमएस आया था। उसके बाद यह माल लेकर आ गए थे। लेकिन अभी तक बारदाना नहीं मिला, ना सर्वेयर ने माल चेक किया। जैसा माल लेकर आए थे, वैसा ही रखा हुआ है। और वह लंबे समय से माल की रखवाली कर रहे हैं। तो इसे सुखाने में लगे हुए हैं अगर सरकार नहीं खरीद पाएगी तो मजबूरी में हमें व्यापारियों को औने पौने दाम पर गेहूं बेचना पड़ेगा। यह हालत तब है जब निश्चित संख्या में किसानों को एसएमएस भेज कर बुलाया जाता है।

तय मानक से ज्यादा तौल ले रहे हैं।
खरीद केंद्र में काम कर रहे लेबर का कहना है कि, अगर सूत की बोरी में माल भरा जाता है। तो कुल तौल 5200 किलो से अधिक ली जाती है।

इस बारे में खरीद केंद्र प्रभारी पूरन सिंह तोमर से बात की गई तो उनका कहना है कि, सरकार की तरफ से जमीन पर कुछ बिछाकर स्टैक लगाने के लिए कोई व्यवस्था नहीं की जाती। इसलिए जमीन पर ही गेहूं को रख दिया जाता है। उसी पर उसके स्टेक लगाए जाते हैं। इस बीच अगर बारिश हो जाए और गेहूं भीग जाए, तो इसमें वह कुछ नहीं कर सकते। सूत की बोरी में किसानों से जोत और ली जाती है वह 50 किलो 600 ग्राम ली जाती है और प्लास्टिक की पूरी में किसानों से 50 किलो 200 ग्राम की तौल ली जाती है। बीते 1 सप्ताह से बारदाने की कमी है। मयंक वेयरहाउस के अचानक बंद होने पर, वहां से आने वाले किसानों की तादाद बढ़ गई है। इसलिए नहीं कह सकते कि अभी, कितने किसानों का गेहूं खरीदना बाकी है। तकरीबन पूरे क्षेत्र में बारिश में भीगते हुए गेहूं की तस्वीरें सार्वजनिक है मगर फिर भी अधिकारियों के कान पर जूं नहीं रेंग रही मीडिया का फोन वह उठाने की जहमत नहीं उठाते और ना ही कोई जवाब देना जरूरी समझते हैं अधिकारियों के इस गैर जिम्मेदाराना रवैया पर कोई कुछ बोलने को तैयार नहीं है और किसान अपने हालात में मजबूर होकर परेशान हैं।
गौर करने लायक बात यह है कि बारिश की आशंका को देखकर मध्य प्रदेश शासन द्वारा, इस संबंध में उचित उपाय करने के निर्देश जारी किए गए थे। परंतु अधिकारियों द्वारा कोई व्यवस्था नहीं की गई। यही वजह है कि अधिकारी मीडिया के सवालों से बच रहे हैं। जिसका परिणाम, किसानों का गेहूं खुले में भीग रहा है। इस संबंध में जबलपुर दर्पण के पाटन संवाददाता राजेश ठाकुर द्वारा भी अधिकारियों से संपर्क करने की कोशिश की गई लेकिन उनकी तरफ से कोई जवाब नहीं मिला।

इन सवालों के जवाब, हमने विपणन संघ के जिला अधिकारी,रोहित बघेल से जानना चाहा। परंतु उन्होंने फोन रिसीव नहीं किया।

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