डिंडोरी दर्पणमध्य प्रदेश

सिमरिया उप स्वास्थ्य केंद्र में लटक रहा ताला, इलाज कराने झोलाछाप डॉक्टर का सहारा

नंदकिशोर ठाकुर,डिंडोरी ब्यूरो। जिले के डिंडोरी जनपद अंतर्गत ग्राम पंचायत सिमरिया गांव में लाखों रुपए खर्च करके हाल ही में उप स्वास्थ्य केंद्र भवन बनाया गया है, ताकि केंद्र का संचालन कर आसपास के लोगों को स्वास्थ्य सुविधा मुहैया कराई जा सके। बावजूद उप स्वास्थ्य केंद्र भवन सिमरिया में पिछले कई दिनों से ताला लटका हुआ नजर आ रहा है, इलाज कराने पहुंचे आसपास के ग्रामीण इधर उधर भटकने को मजबूर हैं। ग्रामीणों ने बताया कि लोग हल्की बीमारी का इलाज कराने के लिए गांवों में केवल झोलाछाप डॉक्टरों पर ही निर्भर होते हैं,उन्हीं के इलाज के सहारे ही अंचलों में वर्षों से ग्रामीणों के हल्की बीमारी ठीक भी हो रहे है। गौरतलब है कि कोविड-19 महामारी के दौरान ही शासन प्रशासन द्वारा झोलाछाप डॉक्टरों पर की जा रही कार्रवाई को ग्रामीण अनुचित बता रहे हैं।

एक और देश वैश्विक महामारी कोविड-19 से प्रभावित है, जिले में भी मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है, जिससे शासन प्रशासन को कोविड-19 के मरीजों को समुचित इलाज की व्यवस्था करवाने में परेशानी हो रही है। तत्कालीन परिस्थितियों को देखते हुए जिला प्रशासन द्वारा जिले के सभी स्वास्थ्य व्यवस्थाओं को दुरुस्त किए हैं। ताकि महामारी के दौरान लोगों को समुचित इलाज की व्यवस्था करना सुनिश्चित सके, बावजूद डिंडोरी के ग्रामीण अंचलों में बने स्वास्थ्य केंद्रों के हाल-बेहाल नजर आ रहे हैं।

केंद्रों में लटक रहे ताले तो कैसे मिले ग्रामीणों को इलाज।

गौरतलब है कि शासन प्रशासन द्वारा लाखों, करोड़ों रुपए खर्च करके जिले के चिन्हित स्थानों में स्वस्थ केंद्र खोलने के लिए भवन बनवाए हैं, प्रशासन स्तर से व्यवस्थाएं भी लगभग पूरी की जाती है, ताकि ग्रामीण अंचलों में लोगों को इलाज की सुविधा मिल सके। लेकिन देखरेख व मैनेजमेंट के अभाव में ग्रामीण अंचलों के अधिकतर स्वास्थ्य केंद्र भवन या तो जर्जर है या फिर अधिकतर केंद्रों में ताले लटके हुए नजर आ रहे हैं।महामारी के दौरान भी कई स्वास्थ्य केंद्र ऐसे भी हैं जहां हल्की बुखार, खांसी, उल्टी, दस्त सर्दी जुखाम आदि की दवाइयां भी स्टोर में उपलब्ध नहीं है और ना ही लोगों को वितरण किया जा रहा, जिससे ग्रामीण अंचलों में स्वास्थ्य व्यवस्था चरमराई हुई है। आरोप लगाया गया कि जिले के जनप्रतिनिधि भी इस ओर कोई ठोस पहल नहीं कर रहे, जिससे ग्रामीण अंचलों में बसे सैकड़ों गांवों के लोगों को कोविड-19 महामारी के दौरान भी स्वास्थ्य सुविधाओं का लाभ लेने से वंचित है।

गांवों में झोलाछाप डॉक्टर बने हैं, ग्रामीणों के इलाज का सहारा

जिले के ग्रामीण अंचलों में स्वास्थ्य व्यवस्थाएं पूरी तरह से चरमराई हुई है, कई स्वास्थ्य केंद्रों में ताले लटके हुए नजर आ रहे हैं तो कई स्वास्थ्य केंद्रों में पर्याप्त दवाइयों के स्टाक ही उपलब्ध नहीं है। ताजा मामला जनपद पंचायत डिंडोरी अंतर्गत ग्राम पंचायत सिमरिया गांव में सामने आया है, जहां बने उप स्वास्थ्य केंद्र भवन से लोगों को स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा, जबकि गांव में अधिकतर आदिवासी लोग ही निवासरत। बताया गया कि उप स्वास्थ्य केंद्र भवन में बाउंड्री वाल नहीं बनाई गई, बिजली, पानी की समुचित व्यवस्था भी नहीं है,जिससे लोग परेशान नजर आ रहें हैं। क्षेत्र के अधिकांश गांवों में शासन द्वारा संचालित स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ न मिलने से स्थानीय झोलाछाप डॉक्टर ही ग्रामीणों का इलाज कर रहे हैं,स्थानीय ग्रामीण भी झोलाछाप डॉक्टरों को दुहाई दे रहे हैं, जो कोरोना महामारी के दौरान भी हल्की बीमारी का इलाज कर मरीजों को ठीक कर रहे हैं।

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