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165 दिन से समाधि साधना में रत  ”श्रद्धा श्री”

 जबलपुर शिवनगर में आचार्य विद्यासागर जी महाराज के आशीर्वाद एवं आर्यिका दृढ़मति माताजी की प्रेरणा से 88 वर्षीय कटंगी सिंघई परिवार की गौरव  “श्रद्धाश्री ” माताजी की समाधि की सल्लेखना चल है। आपने विगत 165 दिन में से करीब 120 दिन मात्र उबली हुई लौकी दिन में केवल एक बार ग्रहण की थी। उसके बाद से दिन में एक बार जल मात्र ले रही हैं और 46 जल उपवास हो चुके। लगातार 17 दिनों से मात्र दिन में एक बार जल ग्रहण करते हुए  जल उपवास की साधना जारी है। जैन दर्शन में संल्लेखना समाधि जीवन की सर्वोच्च सर्वोत्कृष्ट साधना होती है जिसका साक्षात प्रमाण इन दिनों शिवनगर कॉलोनी में देखने को मिल रहा है। मां सजग हैं ,जागरूक है, उत्साहित है ,शरीर से कृश हैं किन्तु व्रत नियम पालन में कठोर हैं, प्रभु भक्ति में रत  है, सांसारिक मोह माया से विरत हैं , बुद्धि से प्रखर हैं , तत्व ज्ञानी हैं  साथ ही आत्मविश्वास को बढ़ाते हुए समाधि की एक एक सीढ़ी पर आबद्ध हो मुक्ति की साधना कर रही हैं ।
            शिवनगर निवासी विकास जैन चौधरी ने जानकारी देते   हुए बताया कि “श्रद्धा श्री” माताजी के दो पुत्र ब्र. संजीव भैया ब्र. शैलू भैया जी है। ब्रह्मचारी विक्रम भैया शिवनगर, ब्र.आराधना दीदी गुना,मेघा दीदी आदि  क्षपक की सेवा में अहर्निश संलग्न है। पूज्य *श्रद्धाश्री* माताजी ने जीवन भर व्रत, उपवास, दान, पूजा, में अपना जीवन अर्पित किया था। सरल थी इसलिए सरलता से समाधि की साधना चल रही है। शिवनगर जैन मंदिर समिति द्वारा सल्लेखना रत माताजी के लिए आवश्यक सुविधाओं का व्यवस्थित इंतजाम किया गया है। सादर जय जिनेंद्र।

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