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आशुतोष को मिले इंसाफ भाग-2 अपने बेटे को इंसाफ दिलाने के लिए, लड़ रहे हैं मां के आंसू।

आशुतोष को मिले इंसाफ भाग-2
अपने बेटे को इंसाफ दिलाने के लिए, लड़ रहे हैं मां के आंसू।
पुलिस ने नहीं उठाया अब तक कोई ठोस कदम।
जबलपुर। अपने बेटे की अचानक सड़क दुघर्टना में मृत्यु से सदमे में आए, चौबे परिवार की व्यथा,आंसुओं में डूबी हुई है। शासन प्रशासन उनकी परेशानियों पर मौन साधे बैठा है। कोविड-19 के नियमों का हवाला देकर, पहले तो उन्हें अपने घायल बेटे से मिलने से रोका गया। और इसके बाद उसकी मृत्यु वाले दिन से लेकर, तेरहवीं के दिन हुए हंगामे तक,बहू की संदिग्ध गतिविधियों और बेटे के मोबाइल डाटा से प्राप्त जानकारी के आधार पर। वह इस निष्कर्ष पर पहुंचे, कि एक सोची समझी साजिश के तहत, उनके बेटे की हत्या की गई है।
इससे जुड़े सबूतों को लेकर, बेटे को इंसाफ दिलाने के लिए एक पिता दर-दर की ठोकरें खा रहा है। और पुलिस प्रशासन उनकी किसी भी बात पर ध्यान देने को तैयार नहीं है।
गौरतलब तथ्य यह है कि मृतक आशुतोष चौबे नरसिंहपुर के करीब एक्सिस बैंक में काम करते थे। उनकी शादी समाधि रोड टिकरिया निवासी गुलाब धर बढ़गईयां की बेटी पल्लवी बढ़िया से की गई थी। लेकिन विगत 23 मई 2020 को आशुतोष चौबे की नरसिंहपुर से लौटते समय एक सड़क दुर्घटना में मृत्यु हो गई थी।
इस बारे में मीडिया के सामने अपनी व्यथा रखते हुए आशुतोष की मां श्रीमती गीता चौबे ने घटना वाले दिन का जिक्र किया। उन्होंने बताया कि उनका बेटा अक्सर सप्ताह के अंत में शनिवार को घर आया करता था।
लेकिन इस बार 22 मई 2020 को सुबह 9:30 बजे उन्होंने अपने बेटे को फोन लगाया। तो वो बोला, कि वो कल आएंगे। उसी दिन शाम को 4:00 बजे बेटे का फोन घर के दूसरे नंबर पर आया। पर किसी कारणवश वो उठ नहीं पाया। इसके बाद बहू के मोबाइल पर बेटे का फोन आया और मां ने जब अपने बेटे से बात की, तो उसने बताया कि इस बार उनकी बहू पल्लवी,उनके बेटे को बार बार फोन करके परेशान कर रही है। इस वजह से वह 1 दिन पहले घर आ रहा है। अपने बेटे के आज ही आने से मां को खुशी तो हुई पर चिंता इस बात की भी हुई कि अचानक इस तरह आने की वजह क्या थी। दूसरी बार लगभग 6:00 बजे जब उन्होंने, अपने बेटे से बात की तो बेटे ने बताया, क्यों नरसिंहपुर में है और 4 से 5 लोग उसका पीछा कर रहे हैं और वह पुलिस को फोन लगा रहा है सुरक्षित है। वह सही समय पर घर आ जाएगा।
इसके लगभग आधे घंटे बाद 6:20 पर बैंक मैनेजर का आशुतोष के पिता के मोबाइल पर फोन आया। जिसमें उन्होंने पिता से अपने बेटे के मोबाइल पर फोन करने के लिए कहा। पिता ने जो अपने बेटे के मोबाइल पर फोन किया। तो किसी दूसरे व्यक्ति ने फोन उठाया और उनके बेटे के एक्सीडेंट की जानकारी दी। और शीघ्र ही नरसिंहपुर पहुंचने की बात कही। इसके बाद आशुतोष के पिता श्यामसुंदर चौबे, अपने वाहन से नरसिंहपुर पहुंचे। तो उनके बेटे को अस्पताल में भर्ती कराया जा चुका था और बेटे के ससुराल वाले वहां मौजूद थे। पुलिस ने कोविड-19 के नियमों का हवाला देते हुए, उन्हें अपने बेटे से मिलने नहीं दिया। इसके बाद उन्हें दूसरे दिन सुबह आने के लिए कह दिया गया। अगले दिन सुबह 7:00 बजे जब वह नरसिंहपुर के स्टेशन गंज थाने पहुंचे। तो उन्हें यह सूचना दी गई, कि उनका बेटा, अब इस दुनिया में नहीं है। अस्पताल चलना है, ताकि पोस्टमार्टम के बाद उसका पार्थिव शरीर ले सकें।
सदमे ने के बाद सदमा सहन करते हुए किसी तरह, पिता अपने बेटे के पार्थिव शरीर को एंबुलेंस में रखकर,अपने घर जबलपुर ले आए।
यहां उसका अंतिम संस्कार किया गया। इस दौरान पल्लवी के साथ उनकी मां भी, यही इसी घर में रह रही थी। 26 मई को गुलाब धर बढ़गईयां के द्वारा रात के वक्त फोन पर, धमकाने के अंदाज में श्यामसुंदर चौबे से कहा गया। कि आप अपना मुंह बंद रखना,आशुतोष के बीमे की डेढ़ करोड़ की राशि मिलेगी। उनकी पहुंच बहुत ऊपर तक है।
इस बात से वह काफी व्यथित हुए, इस बीच पल्लवी बड़गईयां,आशुतोष के मोबाइल के बारे में लगातार पूछताछ कर रही थी। लेकिन उस समय आशुतोष के मोबाइल के विषय में, किसी को कुछ ध्यान ही नहीं रहा। तेरहवीं वाले दिन ,पल्लवी के माता-पिता और दूसरे लोग, ना केवल पल्लवी को अपने साथ ले गए,बल्कि आशुतोष के परिजनों के साथ मारपीट भी की और घर का पैसा और जेवर भी ले गए।
इसके बाद आशुतोष के मोबाइल की खोज की गईऔर उसका डाटा निकाला गया। तो कई चौंकाने वाली जानकारियां निकल कर सामने आईं।
आशुतोष के एक्सीडेंट के ठीक पहले तक, उनकी बहू पल्लवी लगातार उसे, फोन कर रही थी। व्हाट्सएप चैट और मैसेजेस से मिली जानकारी के बाद धीरे-धीरे श्यामसुंदर चौबे को यह यकीन हो गया। कि उनके बेटे की हत्या में कहीं न कहीं, पल्लवी संदिग्ध है। इस बाबत उन्होंने तत्कालीन थाना प्रभारी से शिकायत की। उसके बाद नरसिंहपुर के सुपरिटेंडेंट आफ पुलिस से शिकायत की। जबलपुर पुलिस सुपरिटेंडेंट से शिकायत की और शिकायतों का लंबा सिलसिला, अभी तक जारी है। लेकिन अब तक पुलिस ने उनसे, आशुतोष का मोबाइल लेकर उसकी जांच करना भी जरूरी नहीं समझा। ना ही आशुतोष के दोषियों के खिलाफ, कोई केस दर्ज किया।
उल्टा आशुतोष के परिजनों को ही धमकाया जाने लगा। यह तमाम जानकारियां मीडिया को देते हुए, स्व.आशुतोष के पिता श्यामसुंदर चौबे ने पुलिस प्रशासन और न्यायपालिका से गुहार लगाई है। कि उनके बेटे की मौत के दोषियों को पकड़कर, जल्द से जल्द उन्हें सजा दी जाए। ताकि उनके बेटे को इंसाफ मिल सके।

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