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बेल पर छूटकर बना मुसीबत, कार्रवाई ना होने से, निराश हुई पीड़िता

पीड़िता को धमका रहा है आरोपी और पुलिस के मौन पर, उठ रहे हैं सवाल

जबलपुर। सरकार महिलाओं की स्थिति को सुधारने के, कितने ही दावे कर ले। महिला सुरक्षा के नाम पर कितनी ही बार, देश के मंत्री और प्रदेश के मुख्यमंत्री गाल बजा लें। लेकिन जमीनी हकीकत, तब तक नहीं सुधर सकती। जब तक कि पुलिस का रवैया, महिलाओं के प्रति संवेदनशील और सहयोगात्मक नहीं रहता।
यह मामला है एक विधवा महिला का जिसके पति अब इस दुनिया में नहीं रहे आज से 6 साल पहले दीपक सेन नाम के युवक ने, इसे काम दिलाने के बहाने दोस्ती की, और दोस्ती के बाद धीरे-धीरे नज़दीकियां बढ़ाने लगा।
नजदीकियां बढ़ जाने पर। इनकी मुलाकात अक्सर होने लगी। युवक ने लड़की से शादी का वादा किया। इसके बाद दोनों के बीच संबंध बनते चले गए लड़की गर्भवती हुई और शादी की बात की, तो लड़के ने गर्भपात करा दिया। और गुस्सा हो गया कहा की शादी के बाद बच्चे पैदा कर लेंगे। इसके बाद जब भी वह शादी की बात करती,तो लड़का उसे टाल देता। ज्यादा जिद करने पर मारपीट पर उतारू हो जाता। पीड़िता की माने, तो आरोपी युवक ने एक बार उसे बहुत बुरी तरह मारपीट की थी। महिला ने आरोपी की सरकार से तंग आकर। उसके खिलाफ मदन महल थाने जून 2019 में रिपोर्ट दर्ज कराई। बलात्कार का मामला दर्ज होने के बाद। आरोपी युवक जमानत पर बाहर है। उस युवक ने महिला को, परेशान करने का सिलसिला बना लिया। वह जहां काम करती। उसे वहां भी परेशान करने लगा। महिला को तेजाब से नहला देने की धमकी देने लगा। इन तमाम मामलों में पुलिस का रवैया बड़ा ही आश्चर्यजनक रहा। बलात्कार का केस दर्ज होने के बाद भी, पीड़िता ठोकरे खा रही है। न्याय की गुहार लगा रही है। पर उसकी आवाज नहीं सुनी नहीं जा रही है। आवश्यकता है, फरियादी को समय पर न्याय देने की। ताकि उसके साथ कोई अनहोनी होने से पहले, आरोपी को सबक मिल सके। मगर समस्या ये है कि, जिम्मेदारों के कानों पर जूं नहीं रेंग रही।

बलात्कार के आरोपी द्वारा, बेल पर बाहर आने के बाद, पीड़िता को धमकाने की शिकायत मिली है। इस संबंध में कानून के अनुसार, कार्रवाई की जा रही है।
सिद्धार्थ बहुगुणा
पुलिस अधीक्षक जबलपुर

मेरे ऊपर साल 2019 में पीड़िता द्वारा झूठा मुकदमा, बलात्कार की धाराओं के तहत दर्ज कराया गया। मेरी उनसे मुलाकात, एक लोन के सिलसिले में हुई थी। जिसके बाद मानवीय आधार पर मैंने उनकी आर्थिक मदद भी की।
किंतु इस बात का उन्होंने अन्यथा मतलब लिया और मुझे मानसिक रूप से परेशान करने लगी। उनके द्वारा दर्ज कराए गए झूठे मुकदमे की वजह से मैं आज बेरोजगार बैठा हूं।10 महीने जेल में रहकर आया हूं। अपने माता-पिता का इकलौता सहारा हूं। मेरे पास अपने आप को खत्म करने के अलावा और कोई रास्ता नहीं दिख रहा। इनके साथ कुछ और लोग भी मिले हुए हैं। समझौता करने के लिए मुझसे ₹500000 की डिमांड की जा रही है। जिसे देने में असमर्थ हूं। मेरी प्रशासन से प्रार्थना है, इस मामले में उचित कार्रवाई करते हुए, मुझे न्याय दिलाने की कृपा करें।
दीपक सेन
आरोपी युवक

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