साहित्य दर्पण
रौनक़ की राह

ख्वाहिशों का नगर
हो बेशक अनंत विशाल
पर मानस मन में
पुनीत चाहतें गर सजीव रहे
होता तभी जवाहर जीवन
ज्ञान ज्योति के प्रकाश से
जीवन का ये सन्देश
राज़ सार्थक बतलाता है !
ख्वाहिश हो गर आगाज़
तो अंजाम हो राह अथक कर्म की
गौरव गाथा भी है मुमकिन
इक नन्ही सी आशा पे
आरती होगी सम्पूर्ण तभी
जग में कर्म विधान की
जीवन का ये सन्देश
राज़ खुशहाली का दर्शाता है !
ज़मीं से रिश्ता रखें बनाए
और लाएं कोशिशें में रवानगी
महसूस करें इक चाहतों को
सुन्दर होंगे ख्वाब सभी
ज़िन्दादिल रहे ख्वाहिशें
राख होने में डरना कैसा
जीवन का ये सन्देश
राह रौनक़ की दिखलाता है !
मुनीष भाटिया
585, स्वस्तिक विहार,जीरकपुर,चंडीगढ़
मोबाइल न. 9416457695



