पत्रकारों के प्रकरण में उठी निष्पक्ष जांच की मांग।

पत्रकारों के प्रकरण में उठी निष्पक्ष जांच की मांग।
मेरे बेटे ने समय पर,सारी औपचारिकताएं पूरी की: प्रदीप श्रीवास्तव।
जबलपुर। हर पेशे के अपने कुछ उसूल होते हैं। और काम करने का अपना एक तरीका। लेकिन काम करने का तरीका, दूसरों को परेशान करने वाला हो, तो परिणाम विस्मयकारी होते हैं।
कुछ ऐसी ही समस्या से गुजर रहा है, लोकतंत्र का चौथा स्तंभ। यह भी अब आरोपों से अछूता नहीं रहा। आरोपों के हालात से जूझता मीडिया, संस्कारधानी जबलपुर में भी संघर्ष कर रहा है। सच्चाई क्या है? यह तो पुलिस की जांच और अदालत के निर्णय के बाद सामने आएगी। लेकिन वर्तमान में हालात, उन परिजनों के लिए बड़े कठिन है। जिनके परिजनों को, फर्जी पत्रकारिता के नाम पर,आरोपी बनाया गया है।
अपनी व्यथा लेकर पुलिस अधीक्षक कार्यालय पहुंचे, अंकित श्रीवास्तव के पिता प्रदीप श्रीवास्तव ने, मीडिया से बात की और उन्हें बताया कि, आज वो अपनी पत्नी और परिवार के साथ, पुलिस अधीक्षक महोदय के सामने, इस बात को रखने के लिए उपस्थित हुए थे। कि उनके बेटे अंकित श्रीवास्तव ने, समय-समय पर उन तमाम औपचारिकताओं का पालन किया। जो किसी मीडिया हाउस को चलाने के लिए, सरकार द्वारा निर्धारित थे। फर्जी पत्रकारों की भीड़ में कुछ ऐसे लोगों को भी आरोपी बना कर जेल में रखा गया है जो समय समय पर शासन प्रशासन को अपनी तमाम जानकारियां देते आए हैं। अंकित का इस पूरे मामले से,दूर तक कहीं कोई लेना देना नहीं है। लेकिन फिर भी एसपी साहब से प्रार्थना है। कि वे स्वयं इस मामले की बारीकी से जांच करें और सच्चाई का पता लगाएं।
उनके बेटे को, जिन सबूतों और बयानों के आधार पर, आरोपी बनाकर जेल में भेजा गया है।
उसका अंतिम निर्णय तो अदालत से होगा। लेकिन इस मामले की तह तक जाकर, सच्चाई का पता लगाना जरूरी है। वे निष्पक्ष और बारीकी से जांच की मांग को लेकर, पुलिस अधीक्षक कार्यालय मैं आए हैं। अंकित की पत्नी और उनकी बहू, बहुत जल्द ही दुनिया में एक नन्हे मेहमान को लेकर आने वाली है। लेकिन इस विषम परिस्थितियों ने, उनकी समस्याओं को और बढ़ा दिया है। पत्रकारिता के पेशे में निसंदेह ऐसे लोग भी हैं। जो गलत काम करते हैं। उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। श्री श्रीवास्तव ने यह भी कहा,कि अगर उनके बेटे का, इस मामले से दूर तक भी, कहीं कोई लेना-देना निकलता है। तो वह उसकी जमानत भी नहीं लेंगे।



