साहित्य दर्पण

मेरे प्यारे अध्यापक

हूं यदि मैं सफल तो सिर्फ आपकी ही बदौलत
जो भी मिला है मुझे सब आपकी दी है शिक्षा ।।

मार्गदर्शक हो मेरे आप श्री कृष्ण की ही भाती!
सुनता हूं आपको नित आपका अर्जुन बनकर।।

नमन करूं में आपको नित गुरुवर हो आप मेरे
आपका में नाम करू आपका अनुसरण करकर।।

मेरे प्यारे अध्यापक ! लिख रहा हूं जी में ये खत
मात पिता तुल्य आप भूलेगा नही कभी ये शिष्य ।।

सम्मान करू में नित आपका करके चरण वंदन
सफल हूं आपसे ही आपका दिया है मार्गदर्शन

हर दिन ही नया पाठ यह जीवन मुझे पढ़ता है !
मेरे प्यारे अध्यापक आपकी सीख याद दिलाता है ।।

प्रतिभा दुबे (स्वतंत्र लेखिका)
ग्वालियर मध्य प्रदेश

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