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ग्रामीण क्षेत्र में गहराया जल संकट 

टैंकर से सप्लाई करने का नहीं है अधिकार
 रवि शंकर पाठक,उचेहरा। जनपद पंचायत उचेहरा के अंतर्गत कई ग्राम पंचायतों में पानी का भीषण संकट बना हुआ है। इस मामले में पीएचई विभाग की लापरवाही के चलते ग्रामीण क्षेत्रों के रहवासियों को पानी नहीं मिल पा रहा है। लिहाजा ग्राम पंचायतों को यह अधिकार नहीं है कि टैंकरों के माध्यम से रहवासियों को पानी उपलब्ध कराएं। ऐसे ही हालात उस जनपद पंचायत नागौद की ग्राम पंचायतों में भी देखा जा रहा है। लेकिन प्रशासन की अनदेखी के चलते ग्रामीण पार्क काफी परेशान हो रहे हैं।
प्रदेश में तापमान में लगातार वृद्धि हो रही है। ऐसे में ग्रामीण अंचल में जलसंकट गहराने लगा है। खासकर पठार (पहाड़ी) पर बसे ग्रामीणों को पानी के लिए दूर खेतों तक जाना पड़ रहा है। आठ-आठ घंटे बिजली गुल रहने या कम वोल्टेज के कारण टंकियां नहीं भर पा रही हैं। इस कारण पानी की व्यवस्था नहीं हो रही है और लोगों को कुओं की तलहटी में जाकर पानी निकालना पड़ रहा है। कई जगह पानी खरीदने की नौबत भी आ गई है। 
मुख्यमंत्री के निर्देश का असर नहीं-एक बैठक के बादमुख्यमंत्री की नाराजगी के बाद पीएचई ने इंजीनियरों की टीम मैदान में उतार दी है। मैदानी अधिकारियों से कहा गया है कि चाहे नए ट्यूबवेल खोदने पड़ें, हैंडपंप लगाने पड़ें, निजी नलकूपों का अधिग्रहण करना पड़े या पानी का परिवहन करना पड़े, जनता परेशान नहीं होनी चाहिए। अधिकारी दौरा करें और हर शिकायत की सुनें एवं निराकरण करें।लेकिन इन निर्देशों का पालन ग्रामीण क्षेत्रों में पीएचई विभाग नहीं कर पा रहा है।
कागजों में की गई तैयारी-जिले में जल संकट गहरा गया है, पीएचई विभाग की तैयारी सिर्फ कागजों पर ही नजर आ रही है। यही वजह है कि ग्रामीण क्षेत्रों में जहां लोग 15 -15 दिनों से पानी का इंतजार कर रहे हैं। वहीं शहरी क्षेत्रों में भी कई स्थानों पर टैंकर के जरिए पानी सप्लाई किया जा रहा है।  ग्राम बिहटा भी जल संकट से जूझ रहा है। वहीं दूसरी ओर गोवराव, पोड़ी और खोह ब्लाक में पेयजल परिवहन के हालात बने हुए हैं। पहाड़ी जैसे सुदूर आदिवासी अंचल में भी पानी की समस्या बनी हुई है।
पंचायत में गहराया जल संकट-जनपद पंचायत उचेहरा अंतर्गत ग्राम पंचायत पिपरी कला एवं ईचोल में जल संकट गहरा गया है। ग्राम पंचायत भरहता में पानी को लेकर कोहराम मचा हुआ है। मूल श्रोत कुंआ, तालाब, नाले सब सूख गए हैं। गांव में लगे दो हैंडपंप हवा फेंक रहे हैं। ग्रामीण तीन किमी दूर आस, पास के गांव से पानी लाकर किसी तरह गुजर बसर कर रहे हैं आलम यह है कि ग्राम पंचायत के जिम्मेदार सचिव सरपंच व जनपद व विभाग के अधिकारी कर्मचारी गहरी नींद में सोए हुए हैं, जिसके कारण ग्रामीण बूंद बूंद पानी के लिए प्रतिदिन जद्दोजहद करते नजर आ रहे हैं।
धनेह में भी गहराया जल संकट-ब्लाक के धनेह में जल संकट इस कदर गहरा गया है कि यहां पानी के लिए ग्रामीणों को तीन किमी का सफर करना पड़ रहा है। हाल ही में पानी की कमी के कारण खेत में लगी गेहूं की फसल जलकर राख हो गई, लेकिन पानी की कमी के चलते आग नहीं बुझाई जा सकी। गांव में 15 दिनों में एक बार पानी की आपूर्ति की जाती है। यही स्थिति दूसरे क्षेत्रों में भी है।

गर्मी बढऩे के साथ ही पेयजल संकट भी विकराल होता जा रहा है। इस समस्या के गंभीर होने की वजह प्रशासनिक व पंचायत स्तर पर बरती जा रही लापरवाही सामने आई है। जिसके कारण गांव वाले गंभीर पेयजल संकट के साथ-साथ आर्थिक परेशानी से भी घिरे हुए हैं।  वहीं ग्रामीण अंचल के लोग पेयजल की व्यवस्था में लगे हुए हैं।जहां शासन ने कई साल पहले करोड़ों रुपए की लागत से नलजल योजना मंजूर कर दी। जिसका निर्माण भी हुआ लेकिन देखरेख के अभाव में इसका लाभ जनता को नहीं मिल पा रहा है। शुरूआती दौर में ग्रामीणों ने अपनी समस्या से पंचायत स्तर से लेकर तहसील व जिला स्तर के अधिकारियों को अगवत कराया। लेकिन किसी ने भी ग्रामीणों की इस समस्या को गंभीरता से नहीं लिया और न ही कोई वैकल्पिक इंतजाम किए गए। यही कारण है कि लगातार समस्या से परेशान होकर अधिकांश ग्रामीणों ने निजी बोर संचालकों से कनेक्शन ले लिए। जिसका उन्हें हर माह 100 से 500 रुपए तक शुल्क देना पड़ रहा है। ऐसे में वे ग्रामीण ज्यादा परेशान हो रहे हैं जो यह शुल्क देने में समक्ष नहीं हैं। वे प्रतिदिन करीब एक किमी का सफर तय कर पानी ढोकर लाने को मजबूर बने हुए हैं।
जहां ग्रामीण अंचल में पेयजल संकट बना हुआ है। वहीं ग्राम पंचायतों को यह भी अधिकार नहीं है कि टैंकर के माध्यम से ग्रामीण जनों को पानी उपलब्ध करा सके। क्योंकि पीएचई विभाग के द्वारा लगातार दावे किए जा रहे हैं कि पानी सभी को मिल रहा है। कहीं कोई संकट नहीं है। लेकिन मौके पर पहुंचने पर यह बात सिरे से खारिज की जा सकती है। पानी लेने के लिए किस तरह से रहवासी मारामारी करते हैं ।यह देखा जा सकता है।
 इनका कहना है 
इस समय पानी का भीषण संकट बना हुआ है ।कई बार ग्राम पंचायतों में जानकारी दी जाती है। लेकिन जिम्मेदार ध्यान नहीं देते हैं लिहाजा ग्रामीण काफी परेशान होते हैं।
 राम विश्वास कुशवाहागोवराव कला
 ग्राम पंचायतों को यह अधिकार नहीं है कि टैंकर के माध्यम से पानी घर-घर सप्लाई कराई जा सके। जिसके चलते ग्रामीण सुबह से शाम तक पानी की लाइन में लगे रहते हैं।
 सोने लाल प्रजापति पहाड़ी
इस समय तेज गर्मी पड़ रही है और दूर से पानी लाना भी परेशानी का कारण बना हुआ है। ग्राम पंचायत से लेकर जनपद पंचायत के जिम्मेदार आला अधिकारी भी ध्यान नहीं देते हैं।
 सीताराम आदिवासीपन्ना
 पीएचई विभाग की मनमानी के चलते हैंडपंप में सुधार कार्य नहीं कराया जा रहा है ।इस मामले में पीएचई विभाग के जिम्मेदार जमकर लापरवाही कर रहे हैं और प्रशासन ध्यान नहीं दे रहा है।
 सूरज दीन आदिवासी परसमनिया

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