पत्थर खदानों से अवैध उत्खनन जौरों पर, लीज से हटकर हो रहे खनन

नंदकिशोर ठाकुर, डिंडोरी ब्यूरो। डिंडोरी जिले में वैसे तो पिछले कई वर्षों से चोरी-छिपे पत्थर के कई अवैध ठिकाने चल रहे हैं, जहां लीज से हटकर जिम्मेदार लोग पत्थर का अवैध उत्खनन करा रहे हैं। गौरतलब है कि जिले भर के चिन्हित ठिकानों पर चल रहे पत्थर के अवैध उत्खनन से शासन के राजस्व को हर साल करोड़ों का घाटा लग रहा है। आरोप है कि माफियाओं ने अपनी मजबूत पैठ बना ली है और लगातार खनिज संपदा का दोहन करने में आमदा है। जिले भर में नदियों से रेत निकालने के साथ ही खनिज कारोबारियों की गिरोह सक्रिय है, जो पत्थरों के खदानों पर भी अब आ टिकी है। क्रेशर संचालक जो खनन और भंडारण के नाम पर लीज कहीं और की नाम पर लेते हैं, पत्थर का खनन कहीं और से करते हैं, जिसे लेकर अब कई तरह के सवाल खड़े हो रहे हैं। सूत्रों की मानें तो प्रशासनिक अमले की कमी से जूझ रहा विभाग, जिले के विभिन्न पत्थर खदानों तक नहीं पहुंच पाता, जिसका बखूबी फायदा जिले भर के खनन माफिया उठा रहे हैं। ताजा मामला जिले के डिंडोरी, समनापुर, अमरपुर, शहपुरा, मेहदवानी सहित अन्य जनपदों में सामने आया है। बताया गया कि क्रेशर संचालक लीज वाले स्थान को छोड़कर अन्य आसपास के क्षेत्र में भी अवैध खनन कर पत्थर एकत्रित कर रहे हैं। जानकारी अनुसार मामला खनिज विभाग के संज्ञान में भी है, लेकिन कमिशन खोरी व रसूख के चलते कोई ठोस कार्रवाई नहीं होती। अवैध खनन मामले को लेकर कुछ महीने पूर्व डिंडोरी एसडीएम महेश मंडलोई के निर्देशन पर मौके की जांच की गई थी, जिसमें क्रेशर संचालक से दस्तावेज की मांग की गई, लेकिन क्रेशर संचालक दस्तावेज दिखाने से मना कर दिया, जिसे लेकर पंचनामा बनाते हुए कार्यवाही करने विभाग को पत्राचार किया गया है।
क्रेशर संचालकों की मनमानी,नहीं कर रहे नियमों का पालन :- जानकारी अनुसार जिले भर में दर्जनों क्रेशर संचालित हो रहे हैं।अवैध उत्खनन के पत्थर के उपयोग से प्राकृतिक संपदा की लूट की जा रही है, जगह जगह हो रहे अवैध उत्खनन से शासन के राजस्व को हर साल करोड़ों का घाटा भी हो रहा है। बताया गया कि कुछ कथित क्रेशर संचालक शासन के दिशा निर्देशों का पालन नहीं कर रहे और मनमानी पूर्वक क्रेशर का संचालन करवा रहे हैं। जारी नियमों के मुताबिक क्रेशर का संचालन घनी आबादी क्षेत्र से काफी दूर होनी चाहिए, संचालन से पहले आसपास के क्षेत्र में सुनिश्चित की जाए कि कृषि योग्य भूमि ना हो। शासन द्वारा प्रदूषण को नियंत्रण में करने के लिए क्रेशर संचालन के स्थानों पर सैकड़ों हरे भरे पौधे लगाना अनिवार्य है। बताया गया कि संचालन स्थान के चारों तरफ बाउंड्री वाल होना चाहिए, बरसाती नदी, नालों से दूर संचालन करने के निर्देश हैं। लेकिन जिले भर के कुछ कथित क्रेशर संचालक नियमों को ना मानकर मनमानी पूर्वक क्रेशर का संचालन करवा रहे हैं। जिससे प्राकृतिक दोहन, राजस्व को घाटा सहित पर्यावरण को काफी नुकसान पहुंच रहा है। आरोप है कि क्रेशर संचालन से जिले के दर्जनों किसान भी परेशान हैं, जिनकी फसलों पर क्रेशर के संचालन से पत्थरों की उड़ रही धूल फसलों पर जम रही है। लोगों ने जिले भर में चल रहे क्रेशर संचालन की जांच करा कर जिम्मेदारों के खिलाफ कड़ी कार्यवाही करने की मांग की गई है।



