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राज्य निर्वाचन आयोग ने पंचयात चुनाव को लेकर जारी की गाइडलाइन

जबलपुर दर्पण नगर संवाददाता पाटन। आज मध्य प्रदेश में ग्राम पंचायत चुनाव की राज्य निर्वाचन आयोग के द्वारा घोषणा करने के बाद पंचयात चुनाव लड़ने वालों में जश्न का माहौल है। हर व्यक्ति उसमे भागीदारी को तत्पर है। हर मोड़,गली नुक्कड़,गाँव के बाजारों में चुनावों की ही चर्चा जोरों पर है। चर्चा होना भी सहज है। इस चुनाव में भाग्य आजमाने वालों को लंबे वक्त से इस चुनावी घड़ी का इंतज़ार था। जो अब पूरी हुई है। राज्य निर्वाचन आयोग ने चुनाव लड़ने की तय की गाइडलाइन। पंचयात चुनाव में अब प्रत्याशी को अपनी मन मर्जी के मुताबिक चुनाव चिन्ह नहीं आवंटन होंगे राज्य निर्वाचन आयोग स्वतंत्र होगा चुनाव चिन्ह आवंटन करने के लिए इसी के साथ ही मध्यप्रदेश के कुष्ठ रोगियों पर चला राज्य निर्वाचन आयोग का डंडा। अब प्रदेश में कुष्ठ रोग से पीड़ित व्यक्ति पंचायत के चुनाव में भाग नहीं ले सकेंगे यदि किसी व्यक्ति के द्वारा गलत जानकारी देकर चुनाव लड़ा एवं चुनाव जीतकर विजय होता है। वह व्यक्ति कुष्ठ रोग से ग्रस्त है। और उसकी शिकायत होती है तो उसका चुनाव निरस्त किया जाएगा एवं उसके विरुद्ध संविधानिक कार्रवाई की जाएगी पंचयात चुनाव में मतदाताओं की बढी अपेक्षाएं। पंचयात चुनाव में चर्चा जाति गत आकड़ों की न होकर विकास की योजनाओं की होनी चाहिए। मध्य प्रदेश के गावों में आज भी गरीबी, अशिक्षा,बिमारी,कुपोषण की तरह फैली हुई है। बीते वर्षों में विकास हुआ है,किन्तु उसकी गति संतोष जनक नहीं रही है। सरकारों की योजनाओं ने नीति निर्धारकों और उनका संचालन करने वालों की तिजोरियां तो भरी लेकिन योजना का लाभ उपयुक्त व्यक्ति तक नहीं पहुचा। आज पंचायत चुनाव को कमाई का बहुत ही बड़ा साधन बना दिया गया है। नेत्रत्वकर्ता चुनाव जीतने पर मिलने वाली शक्ति का उपयोग ग्राम विकास के लिए नहीं करते बल्कि स्वयं के विकास के लिए करते है। जो समाज के लिये चिंता का विषय है। चूँकि अभी भी ग्रामीण भारत बहुत पीछे है। इसलिए ग्राम स्तर पर आज भी अच्छे और समाज के हित के लिए काम करने वालों के लिए बहुत से अवसर हैं। जरूरत है काम करने की इक्षा-शक्ति की,अच्छी और विकासवाद की सोच की जो की जातिवाद के बंधन से मुक्त हो। संसाधनों की कमी नहीं रह गई है। सरकार की बहुत सी योजनाये मददगार हो सकती है। सरकारी योजनाओ से ज्यादा ग्राम स्तर पर लोगों के जागरूक और संघठित होने की जरूरत है। शिक्षा,स्वास्थ्य, रोजगार,पर्यावरण, सामाजिक उत्थान ये वो विषय हैं जिनके सम्बन्ध में आज की ग्राम पंचायतों को सबसे अधिक सोचने की आवश्यकता है। लोगों का यह मानना है की सूचना का अभाव विकास के दरवाजे बंद कर देता है। समाज जितना ज्यादा अपने अधिकारों और कर्तव्यों के प्रति जागरूक होगा उतना ही प्रगतिशील होगा इसलिए ग्राम स्तर पर सूचना पहुचाने की व्यवस्था की जानी चाहिए और इसके लिए ग्राम पंचायत को सबसे पहले एक पुस्तकालय का निर्माण कराना चाहिए और दैनिक और साप्ताहिक अखबारों की उपलब्धता सुनिश्चित की जानी चाहिए पंचयात नेत्रत्वकर्ता समाज को बहुत कुछ दे सकता है। ग्राम पंचायत स्तर पर चुनौतिया अधिक हैं लेकिन कुछ करने के अवसर उतने ही ज्यादा है। आवश्यकता है चुनाव जीतकर उसको समाजसेवा का अवसर समझने की, न की कमाई करने का अवसर समझने की

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