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लोहे पर जंग क्यों और कैसे लगती है

रोचक जानकारी

“लोहे पर जंग क्यों और कैसे लगती है”

संकलन✍🏻 आशीष जैन (जबलपुर दर्पण)

लोहे की चीजों को अगर किसी नमी वाले स्थान पर कुछ दिन रख दिया जाए तो इन चीजों पर कत्थई रंग की एक परत सी जम जाती है, इसी को जंग लगना कहते हैं। अर्थात लोहा खराब ओर बरबाद हो जाता है. इस तरह आयरन ऑक्साईड का बनना लोहे में जंग लगना कहलाता है, तथा इसी आयरन ऑक्साइड को जंग कहते हैं। जंग वास्तव में लोहे का आक्साइड है। जब लोहे के परमाणु आक्सीजन से मिलते यानी संयोग करते हैं, तो लोहे का आक्साइड बनता है। लोहे के परमाणुओं का आक्सीजन से मिलना आक्सीकरण की क्रिया कहलाती है । लोहे पर जंग लगने के लिए आक्सीजन और नमी का होना अत्यंत आवश्यक है। नमी और आक्सीजन की उपस्थिति में लोहे के परमाणु धीरे-धीरे आक्सीजन से मिलकर लोहे का आक्साइड बनाते रहते हैं और जंग लगने की क्रिया जारी रहती है। जंग लगने से ठोस लोहे की सतह झड़ने लगती है और कमजोर पड़ जाती है। जंग लगने को रोकना वैज्ञानिकों के लिए एक बहुत बड़ी समस्या रही है। लोहे पर जंग लगने को पेंट या प्लास्टिक की पतली परत चढ़ाकर कुछ हद तक रोका जा सकता है। पेंट या प्लास्टिक की पतली परत के कारण लोहे के परमाणु पानी के संपर्क में नहीं आ पाते हैं इसलिए आक्सीजन लोहे के साथ संयोग नहीं कर पाती है और जंग नहीं लगती है।

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