करोड़ की जमीन को राजस्व विभाग द्वारा किया गया खुर्द बुर्द

उमेश शुक्ला वरिष्ठ कांग्रेस नेता रामपुर बघेलान
दैनिक जबलपुर दर्पण. रामपुर बघेलान कांग्रेस नेता ने भूमाफिया को संरक्षण देने राजस्व विभाग पर लगाया आरोप बिना अधिकार के कंपनी के नाम दर्ज जमीन कर दी गई थी भू – माफियाओं के नाम दोषियों पर तत्काल कार्रवाई की मांग कांग्रेस नेता उमेश शुक्ला जनपद सदस्य बढौरा में रामपुर बाघेलान में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर दोषियों पर तत्काल कार्रवाई की मांग करते हुए कहा है कि अगर दोषियों पर प्रशासन द्वारा एफ आई आर दर्ज नहीं कराया गया तो बड़ा आंदोलन किया जाएगा श्री शुक्ला ने कहा कि उक्त मामले का खुलासा मैहर विधायक नारायण त्रिपाठी के विधानसभा प्रश्न क्रमांक 993 में दिए गए जिला कलेक्टर के जवाब से हुआ है इसके बावजूद भी रामपुर राजस्व विभाग भूमाफिया से सांठगांठ कर मामले को रफा-दफा करने की फिराक पर है अगर समय रहते उचित कार्रवाई नहीं हुई तो बड़ा आंदोलन किया जाएगा, रामपुर बाघेलान तहसील क्षेत्र के पटवारी हल्का गाड़ा के मौजा लोहरा का है जहां की आराजी नंबर 11 रकवा 0.146 हेक्टेयर, 12/अ/ 2 रकवा 0.312 हेक्टेयर ,12/ब के रकवा 0.057 हेक्टेयर, 28/2 के रकवा 0.032 हेक्टेयर भूमि सेठी स्टोन लाइन इंडस्ट्रीज सिविल लाइन सतना के पार्टनर एम एस सिंह आनंद साकिन सिविल लाइन के नाम वर्ष 1980 – 81 से दर्ज थी। बताया जाता है कि इनके नदारद हो जाने के बाद कोई वारिस सामने नहीं आया। तत्कालीन तहसीलदार एवं पटवारी ने फर्जीवाड़ा करते हुए उक्त भूमि को वर्ष 1986-87 मे कब्जा दर्शाते हुए सिंधौली निवासी प्रमोद सिंह पिता तेज बहादुर सिंह के नाम दर्ज कर दी। तहसीलदार ने राजस्व प्रकरण क्रमांक 04/अ-26/1997-98 आदेश दिनांक 26 मार्च 1999 के जरिए प्रमोद सिंह को उक्त भूमियों का स्वामी घोषित कर दिया। वर्ष 2002-2003 में यही जमीन प्रमोद सिंह द्वारा बेचने के बाद लक्ष्मी नारायण पिता मोहनलाल गुप्ता साकिन टिकुरिया टोला के नाम हुई। इसके बाद लक्ष्मी नारायण गुप्ता ने उक्त भूमि काम्या सुखेजा पत्नी सतीश सुखेजा को बेच दी। जिसका नामांतरण पंजी क्रमांक 2 दिनांक 26 दिसंबर 06 के जरिए किया गया जबकि यह भूमि कैफियत में मध्य प्रदेश शासन दर्ज होनी चाहिए लेकिन वर्तमान में भी आराजी काम्या सुखेजा के ही नाम दर्ज है सारी हकीकत सामने आने के बाद भी रामपुर तहसीलदार और एसडीएम द्वारा अब तक कोई कार्यवाही नहीं की यूं हुआ खुलासा मैहर विधायक नारायण त्रिपाठी द्वारा अतारांकित प्रश्न क्रमांक 993 के जवाब में अपर कलेक्टर विधानसभा में लगाए गए द्वारा अपने पत्र क्रमांक 735 दिनांक 13 दिसंबर 21 के जरिए प्रमुख सचिव राजस्व को बताया कि उक्त आराजी कंपनी की थी जिसका वारिश न मिलने के बाद शासकीय होनी चाहिए। उन्होंने जवाब में यह भी स्वीकार किया कि रेलवे प्रदेश भू राजस्व संहिता 1959 के प्रावधानों में कब्जे के आधार पर सामने आ जाने के बाद भी ना तो संबंधित भूमि के खसरा कॉलम नंबर 12 में ना तो क्रय – विक्रय पर रोक लगाई गई और ना ही इस भूमि को शासकीय घोषित किया गया।



