अंतरराष्ट्रीय मातृभाषा दिवस कार्यक्रम संपन्न

जबलपुर दर्पण। मातृभाषा अभिव्यक्ति का सशक्त माध्यम और संस्कृति की सजीव संवाहक होती है व्यक्तित्व के निर्माण, विकास और उसकी सामाजिक व सांस्कृतिक पहचान बनाती है ,भाषाई और सांस्कृतिक विविधता के बारे में जागरूकता फैलाने और बहुभाषावाद को बढ़ावा देने के लिए संयुक्त राष्ट्र द्वारा हर साल 21 फरवरी का दिन दुनिया भर में अंतर्राष्ट्रीय मातृभाषा दिवस के रूप में मनाया जाता है l बहुभाषावाद भारतीय संस्कृति का मूल भाव है l यहां की भाषाओं में परस्पर संबंध भी हैं यह बात संस्थान के निदेशक दिवाकर द्विवेदी ने कस्तूरबा गांधी बालिका छात्रावास शाहपुरा में आयोजित अंतर्राष्ट्रीय मातृभाषा दिवस पर विचार व्यक्त कर करते हुए कहा। मुख्य अतिथि सरिता उइके ने कहा कि भारत में भाषिक बहुलता आज भी सामाजिक बर्ताव का एक अहम हिस्सा है एक ही समुदाय के सदस्यों द्वारा भी घर, बाहर, कार्यालय और बाजार जैसे विभिन्न संदर्भों में अलग-अलग भाषाओं का उपयोग किया जा रहा है। भारत में सामाजिक न्याय क्षमता और अवसरों की उपलब्धता सुनिश्चित करना अभी अंग्रेजी से संभव नहीं हो सका है आज सबके मन में यह विश्वास घर कर गया है कि अंग्रेजी बोलने वाला व्यक्ति अधिक समझदार होता है। कस्तूरबा छात्रावास में संस्थान के अधिकारियों अरुण कुमार दुबे, अभिषेक चौराहा, रीता मिश्रा, सुनील कुमार झारिया, मिथिलेश परस्ते एवं रिसोर्स पर्सन कृष्ण कुमार गर्ग के निर्देशन में किया गया। कार्यक्रम का सफल संचालन अभिषेक अग्रवाल ने किया l अंत में प्रशिक्षक पूजा कश्यप ने उपस्थित माननीय एवं छात्रों का आभार व्यक्त किया।
कार्यक्रम में संस्थान के रिसोर्स पर्सन श्री हरिओम गौतम, श्री अरुण झारिया, श्रीमती शोभना उसराठे, कु.खुशबू साहू, पूजा बनवासी, सुरभि गुप्ता अपने लाभार्थियों के साथ उपस्थित रहीं।



