सरकार युवाओं को रोजगार देने कानून बनाएं : कांग्रेस

जबलपुर दर्पण। मध्य प्रदेश कांग्रेस के प्रदेश प्रवक्ता टीकाराम कोष्टा ने कहा कि प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान के आव्हान पर प्रदेश सरकार द्वारा आगामी 25 फरवरी को मनाये जा रहे रोजगार दिवस जो प्रतिमाह मनाया जायेगा, को छलावा एवं लाखों बेरोजगारों के साथ एक भद्दा मजाक व उनके जख्मों पर नमक डालने का प्रयास बताया है। उन्होंने कहा कि आज प्रदेश में पंजीकृत बेरोजगार युवाओं का आंकड़ा 34 लाख के करीब पहुंच चुका है और श्रम पोर्टल के अनुसार पिछले पांच माह में देश में 24.54 करोड़ असंगठित कामगार आंकड़ों के साथ मप्र मंे यह संख्या 1.21 करोड़ हो गई है! बावजूद, इस असहनीय स्थिति के हमारे मुख्यमंत्री पिछले दो महीनों में सवा 5 लाख युवाओं को रोजगार देकर आत्मनिर्भर बनाने और प्रतिमाह एक लाख लोगों को रोजगार दिये जाने की बात कह रहे हैं! विधानसभा चुनाव की नजदीकियों के चलते अगले दो वर्षों में 30 लाख लोगों को रोजगार के झूठे सपने दिखाये जा रहे हैं, जो हकीकत से कोसो दूर है। गत् दिनों युवाओं को रोजगार के लिये कानून बनाने की बात कही है, वह न्यायोचित है, क्योंकि जब विधानसभा में बिना चर्चा किये बगैर शिवराज सरकार 21 कानून बना सकती है, जिनका अमल आज तक दिखाई नहीं दे रहा है तो युवा पीढ़ी के व्यापक हितों में इस विषयक काूनन क्यों नहीं? लिहाजा, यह प्रस्ताव आगामी बजट सत्र में ही पारित किया जाए, ताकि बेरोजगार युवा हकीकत से रूबरू हो सकें। हमारी यह भी मांग है कि प्रदेश में व्याप्त बेरोजगारी को लेकर शिवराज सरकार श्वेत-पत्र भी जारी करे। रोजगार नहीं होने के कारण प्रदेश का भविष्य युवा अन्य प्रदेशों में पलायन कर रहा है। गत् रविवार 20 फरवरी को छतरपुर में प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री सुश्री उमा भारती ने तो सीधे तौर पर यह कह डाला है कि रोजगार के अभाव में बुंदेलखंड के पांच जिलों, छतरपुर, टीकमगढ़, पन्ना, हटा और दमोह के 10 से 12 लाख नौजवान पलायन कर मजदूरी करने हेतु दिल्ली चले गये हैं। सरकारी दफ्तरों में 1,15,756 पर रिक्त है। प्रथम श्रेणी से लेकर चतुर्थ श्रेणी तक स्वीकृत पद के बदले लगभग 50 प्रतिशत पद खाली हैं। कुल मिलाकर प्रदेश में प्रशासनिक व्यवस्था को संचालित करने के लिए केवल तृतीय श्रेणी के कर्मचारी बचे हैं। द्वितीय श्रेणी अधिकारियों के लिए आरक्षित प्रमुख पदों पर तृतीय श्रेणी के कर्मचारियों को प्रभारी बनाकर बैठा दिया गया है। सारी प्रशासनिक व्यवस्था चरमरायी हुई है। एक ओर राज्य सरकार जहां युवाओं को रोजगार देने का छल कर रही है, अमानवीय षड्यत्र हैं जो राज्य सरकार की ‘नीति और नियत’ को स्पष्ट कर रहा है।



