धर्म प्रचार व राष्ट्र सेवा से बड़ी कोई साधना नहीं

जबलपुर दर्पण। वर्तमान परिस्थितियों में सनातन धर्म, सनातन संस्कृति व राष्ट्रीय हितों के संरक्षण- संवर्धन द्वारा आदर्श समाज व समुन्नत राष्ट्र के निर्माण से बड़ी कोई साधना नहीं हो सकती। उक्त उद्गार श्री परशुराम धाम विकास समिति द्वारा सनातन धर्म व मानव कल्याण विषय पर आयोजित विचार संगोष्ठी में धर्म प्रचार व जन जागरण के उद्देश्य से तीसरी बार नर्मदा परिक्रमा कर रहे स्वामी देव स्वरूपा नंद जी महाराज ने व्यक्त किए। कार्यक्रम की मुख्य अतिथि व राज्य शिक्षा सलाहकार डॉ. श्रद्धा तिवारी ने कहा कि सनातन संस्कृति में मठ मंदिरों की स्थापना के पीछे देव आराधन के साथ साथ यह भी उद्देश्य था कि धर्म प्रचार व समाज कल्याण के उद्देश्य से देशाटन करने वाले संत महात्मा इन मंदिरों में रुककर व जनमानस का धर्मोपदेश कर धर्मप्रिय व सुसंस्कारित समाज का निर्माण कर सकें। आयोजन में स्वामी नर्मदा दास महाराज, स्वामी ज्ञान दास, डॉ. एच.पी.तिवारी, मनु प्यासी, खुमान विश्वकर्मा, अरुण चंदेल, दामोदर विश्वकर्मा, राजेंद्र तिवारी उपस्थित थे।



