यदि योग में उन्नत होना हो तो स्वास्थ्य सूत्र का रखे ध्यान

जबलपुर दर्पण। भारतीय चिकित्सा पद्धति एवं आयुर्विज्ञान की तरह ही खानपान और उपचार के बारे में सहजयोग संस्थापिका परम पूज्य माताजी निर्मला देवी ने नीरानंद में आ रही बाधाओं को दूर करने के लिए समझाया है कि मानव उत्थान के लिए ध्यान धारणा बहुत जरूरी है, ध्यान की गहनता के लिए निर्विचार होना आवश्यक है, इसके लिए जिगर(लीवर) को ठंडा रखना पड़ता है क्योंकि शरीर के अंदर के महत्वपूर्ण कार्य जिगर द्वारा ही होते हैं। जैसे रक्त शोधन, शरीर और मस्तिष्क में ऊर्जा की आपूर्ति, शरीर से विषैले पदार्थ दूर कर पाचन क्रिया में पित्त रस बनाना, हारमोंस में संतुलन शरीर में आवश्यक प्रोटीन एवं विटामिन में नियमन आदि। श्री माताजी ने शीतलता प्रदायक कुछ खाद्य पदार्थों का सेवन करना बताया है। जैसे चीनी, आंवला, सफेद चावल, दही, छोटे रसीले फल जिसमें अम्ल ना हो, ताजी सब्जी, सलाद, मूली पत्ते की चाय, चना, मूंग, दाल आदि सूरजमुखी तेल एवं जैतून के तेल से खाना बना सकते हैं। जिगर के लिए कुछ हानिकारक खाद्य पदार्थ बताए हैं जैसे दूध से बने पदार्थ, अधिक दूध, कॉफी चिकन, चीज, अधिक नमक आदि से बचना चाहिए। ध्यान धारणा जिगर का सर्वोत्तम आहार है। समय-समय पर योग की तपस्या के दौरान उठने वाले प्रश्न के समाधान की जानकारियां मिलती रहती है जिसे आम जनता भी सहजायोगा डॉटओआरजी डॉटइन के माध्यम से आत्मसाक्षात्कार पाकर सीख सकती है।



