जबलपुर दर्पणमध्य प्रदेश

चुनाव जीतने के बाद संविदा विधुत कर्मियों के नियमितीकरण के संकल्प को भूली भाजपा : तरुण भनोत

जबलपुर दर्पण। केंद्र से लेकर प्रदेशों तक के चुनावों में भारतीय जनता पार्टी चुनावों में घोषणा-पत्र लेकर आती हैं और तमाम तरह के वायदे करके वोटों के ध्रुवीकरण का प्रयास करती हैं और चुनाव जीतने के बाद घोषणा-पत्र में किए गए वायदों को अमल करना तो दूर उन हजारों पीड़ित संविदा कर्मचारियों की सुध लेने तक की चिंता नहीं करती | उदाहरण के तौर पर वर्ष 2013 के विधानसभा चुनावों के मद्देनजर प्रदेश के संविदा कर्मचारियों द्वारा नियमितीकरण के अलावा अन्य मांगों को लेकर भाजपा सरकार के खिलाफ लामबंद होने से डर कर चुनावी घोषणा पत्र में संविदा विधुत कर्मचारियों के नियमितीकरण और उनकी अन्य मांगों को लेकर घोषणा की गई थी, किन्तु 9 वर्ष से अधिक समय बीत जाने के बावजूद भी प्रदेश की भाजपा सरकार द्वारा संविदा कर्मचारियों के नियमितीकरण को लेकर अब तक कोई कार्यवाही नहीं की गई हैं और प्रदेश के हजारों संविदा कर्मचारी भाजपा के द्वारा ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं | प्रदेश सरकार में पूर्व वित्त एवं स्वास्थ्य मंत्री श्री तरुण भनोत ने प्रदेश भाजपा सरकार द्वारा संविदा कर्मचारियों के साथ सरकार पर गंभीर उपेक्षा का आरोप लगाया हैं |
श्री भनोत द्वारा मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान एवं प्रदेश के ऊर्जा मंत्री श्री प्रद्युम्न सिंह तोमर को प्रेषित पत्र में बताया कि संविदा कर्मचारी संघ के द्वारा उन्हे सौंपें गए ज्ञापन में यह जानकारी दी गई हैं कि वे संविदा कर्मचारी जो प्रदेश के लगभग 52 जिलों की विधुत व्यवस्था को सुचारु रूप से संचालित करने के लिए दिन-रात कार्य कर रहे और विपरीत मौसम के बावजूद भी विधुत सेवाओं को अवरोधरहित रखने प्रतिबद्धता के साथ कार्य रहे हैं, किंतु शासन स्तर पर इनके नियमितीकरण की मांग पर अब तक कोई कार्यवाही नहीं की जा रही हैं | जबकि वर्ष 2013 के चुनावी घोषणा-पत्र में भारतीय जनता पार्टी के द्वारा अपने घोषणा-पत्र के पृष्ठ क्रमांक – 33 के अंतर्गत कंडिका- 6 एवं 9 में स्पष्ट रूप से विधुत संविदा कर्मियों की मांग को शामिल करते हुए उनके नियमितीकरण को लेकर कार्यवाही करने की घोषणा शामिल हैं |
श्री भनोत ने प्रदेश के मुख्यमंत्री एवं ऊर्जा मंत्री को संबोधित पत्र में बताया कि वर्ष 2013 से लेकर अब तक वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देशों पर बिना पूर्ण सुरक्षा उपकरण के विधुत कार्य करते हुए अब तक 400 से अधिक संविदा कर्मचारियों की असमय मौत हो चुकी हैं, किन्तु शासन द्वारा इन संविदा कर्मचारियों की ड्यूटी पर तैनाती के दौरान मृत्यु होने पर भी उनके आश्रितों को न तो किसी प्रकार की कोई आर्थिक सहायता दी गई और ना ही परिवार में किसी को अनुकंपा नियुक्ति का लाभ दिया गया, जिससे की संविदा कर्मचारी के असमय मृत्यु से उनके आश्रितों को आत्म-सम्मान के साथ जीवन-यापन करने की सुविधा मुहैया की जा सके | यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण हैं कि नियमित कर्मचारियों की तरह ही पूरी ईमानदारी और जिम्मेदारीपूर्वक अपने दायित्वों का निर्वहन कर रहे संविदा कर्मचारियों के भविष्य को लेकर सरकार ने अब तक कोई कदम नहीं उठाया गया हैं | सरकार के इस भेदभावपूर्ण रवैये के खिलाफ प्रदेश के संविदा विधुत कर्मचारियों में सरकार को लेकर रोष व्याप्त हैं और आगामी दिनों में शासन स्तर पर इनकी मांगों को न मानने की स्थिति में ये संविदा कर्मचारी प्रदेशव्यापी आंदोलन करने की रूप-रेखा पर भी विचार कर सकते हैं और ऐसे आंदोलनों से प्रदेश में जहां एक तरफ विधुत सेवाओं में अवरोध पैदा हो सकता हैं वही दूसरी तरफ प्रदेश में अराजकता का माहौल बनेगा |
श्री भनोत ने मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान एवं ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर को प्रेषित पत्र के माध्यम से अपील की हैं कि संविदा कर्मचारी इस भीषण महंगाई के दौर में गंभीर आर्थिक संकटों का सामना कर रहे हैं और संविदा कर्मचारियों की मांग पर भाजपा द्वारा अपने घोषणा पत्र में इन कर्मचारियों के नियमितीकरण की मांग को शामिल किया गया था और इस घोषणा के 9 वर्षों बाद भी अमल में अबतक नहीं लाया गया हैं | उन्होंने मुख्यमंत्री और ऊर्जा मंत्री से आग्रह किया हैं कि 2013 के घोषणा पत्र को तत्काल अमल में लेते हुए संविदा कर्मचारियों की पुरानी नियमितीकरण की मांग को पूरा किया जाये |

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button

You cannot copy content of this page