कलयुग में भक्तों के ह्रदय में अवतार लेते हैं भगवान: स्वामी अशोकानंद

जबलपुर दर्पण। सनातन संस्कृति की रक्षा और आसुरी वृत्तियों का नाश करने के लिए त्रेता और व्दापर युग में भगवान कौशल्या देवकी मां के गर्भ से अवतरित हुए थे लेकिन कलयुग में भगवान श्रीहरि नारायण भक्तों के ह्रदय में अवतार लेकर धर्म रक्षा के लिए प्रेरित करते हैं। नारायण का नाम स्मरण करने से वृत्तियों से लडने की शक्ति मिलती है। कलयुग में नाम जप करने का अति महत्व है। श्रीकृष्ण के साथ रिश्ते जोड़ने से जीवन में मंगल ही मंगल होता है। उक्त उद्गार स्वामी अशोकानंद जी महाराज ने माघ मास के पुनीत पावन अवसर पर श्री मुख से घड़ी चौक, विजय नगर जबलपुर में श्रीमद्भागवत का महाराज जी ने व्यासपीठ से श्रीहरि के अवतारों के साथ श्रीकृष्ण जन्मोत्सव की भागवत कथा श्रवण कराई।
श्रीमद्भागवत कथा पुराण सप्ताह के तृतीय दिवस चंद्रा परियानी,
मुख्य यजमान अशोक मंजू परियानी, महेश भावना परियानी से श्रीमद्भागवत पुराण, व्यासपीठ का पूजन अर्चन आरती महापौर जगत बहादुर सिंह अन्नू, पं वेदांत शर्मा, विध्येश भापकर, जगदीश दीवान,आचार्य आशीष महाराज, पुष्पराज तिवारी , विजय पंजवानी,
पार्थ, निखिल, जसिका, कविश सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु भक्त जनों की उपस्थिति रही।



